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नाकामी: लापता लोगों को ढूंढने में सबसे फिसड्डी चंडीगढ़ पुलिस, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट ने खोली पोल

Tue, 21 Sep 2021 12:08 PM IST
Trainee Trainee अमित गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़ 

सार

एनसीआरबी की वर्ष 2020 की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। चंडीगढ़ में अब तक 2853 लोगों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। इनमें 1320 पुरुष, 1532 महिलाएं और 1 टांसजेंडर शामिल हैं। पुलिस सिर्फ 257 पुरुषों, 380 महिलाओं और 1 ट्रांसजेंडर को ही ढूंढ पाई है। यह कुल आंकड़ों का 22.4 फीसदी है।
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चंडीगढ़ पुलिस। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट ने चंडीगढ़ की स्मार्ट पुलिस की पोल खोली है। रिपोर्ट के मुताबिक गुमशुदा लोगों को तलाशने में चंडीगढ़ पुलिस केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे फिसड्डी है। पुलिस महज 22.4 फीसदी गुमशुदा लोगों को तलाश सकी है जबकि 77.6 फीसदी लोगों की तलाश अब भी उनके परिजनों को है। वहीं, पंजाब पुलिस सिर्फ 15.2 फीसदी लोगों को तलाशकर देशभर में सबसे फिसड्डी है।
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एनसीआरबी की वर्ष 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक शहर में कुल 2853 लोगों की गुमशुदगी दर्ज की गई थी। इन सबकी उम्र 18 वर्ष से ऊपर है। इनमें 1320 पुरुष, 1532 महिलाएं और 1 टांसजेंडर शामिल हैं। पुलिस इनमें से केवल 257 पुरुषों, 380 महिलाओं और 1 ट्रांसजेंडर को ही ढूंढ पाई है जोकि यह 22.4 फीसदी है, जबकि 1063 पुरुष व 1152 महिलाएं अभी भी गुमशुदा हैं। वहीं, पुडुचेरी पुलिस 73.5 फीसदी गुमशुदा लोगों को तलाश कर सभी केंद्र शासित प्रदेश में पहले स्थान पर है। 
 
2020 में लापता हुए थे 719 लोग
गौरतलब है कि जनवरी से दिसंबर 2020 तक शहर के अलग-अलग थानाक्षेत्रों से 719 लोग लापता हुए थे। इनमें 276 पुरुष व 442 महिलाएं और 1 ट्रांसजेडर शामिल था। वहीं, दिसंबर 2020 तक पुलिस ने शहर से लापता 2853 में से 638 गुमशुदा लोगों का पता लगा लिया। ये आंकड़े 18 की उम्र से ज्यादा वाले लोगों के हैं जबकि नाबालिग भी आए दिन गुमशुदा होते रहते हैं।
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ज्यादातर लोग मानसिक तौर पर होते हैं परेशान  
पुलिस के मुताबिक गुमशुदा होने वाले ज्यादातर लोग या तो मानसिक तौर पर परेशान होते हैं या फिर आपसी विवाद, बेरोजगारी, अमीर बनने की चाह या मर्जी से घर छोड़ देते हैं। इनमें से कई तो कुछ ही दिन में वापस आ जाते हैं, लेकिन कइयों का सुराग नहीं मिलता। ऐसे में उनकी तलाश करना पुलिस के लिए चुनौती बन जाती है। जबकि ऐसे भी कई लोग होते हैं, जिनकी सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती है।
  
मोबाइल लोकेशन व इश्तिहार देने तक सीमित कार्रवाई
बता दें कि शहर में औसतन हर महीने में 10 से 15 लोगों के गुमशुदा होने की शिकायत पुलिस को मिलती है। कई मामलों में पुलिस एफआईआर तो दर्ज कर लेती है, जबकि ऐसे न जाने कितने मामले हैं, जिनमें शिकायतकर्ता बार-बार थानों के चक्कर काट अपनों को तलाशने की गुहार लगाते रहते हैं। पुलिस डीडीआर तो दर्ज करती है, लेकिन मोबाइल लोकेशन व इश्तिहार देने के अलावा व्यक्ति की तलाश के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती। यही कारण है कि थानों में दर्ज गुमशुदा लोगों की सूची लगातार बढ़ती रहती है ।
 
गुमशुदा लोगों को ढूंढने में किस केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस कितनी सक्रिय 
यूटी                                      कितने फीसदी लोग ढूंढे 
पुडुचेरी                                                73.5
 दादरा और नगर हवेली दमन एवं दीव       52.8
 दिल्ली                                                 37.3
 जम्मू-कश्मीर                                        34.5
 अंडमान व निकोबार                               25.6
 लद्दाख                                                 24.4
 चंडीगढ़                                               22.4
 लक्षद्वीप                                  एक भी लापता केस नहीं
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