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देश का ये मशहूर हॉस्पिटल ऑर्गन डोनेशन में रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में, रिपोर्ट

Sat, 08 Jul 2017 03:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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विश्व अंगदान दिवस - फोटो : फाइल फोटो
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आर्गन डोनेशन में देश का एक मशहूर हॉस्पिटल रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। यहां पर हर साल लाखों लोग इलाज कराने के लिए आते हैं। बीते साल कुल 27 केडेवर (दिवंगत) आर्गन डोनेशन हुई थी, मगर इस साल मात्र छह माह के भीतर आर्गन डोनेशन का आंकड़ा 27 पहुंच गया है। इस सफलता के पीछे मुख्य रूप से पीजीआई का आर्गन डोनेशन का अभियान रहा है। लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पीजीआई पिछले दो सालों से ट्राइसिटी में पूरे जोर-शोर से अभियान चला रहा।
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एक हफ्ते में चार आर्गन डोनेशन
अभियान का नतीजा है कि एक हफ्ते में ही चार कैडेवर आर्गन डोनेशन की गई। मंगलवार को 16 साल की सांची को ब्रेन डेड घोषित किया गया। सांची का रोड एक्सीडेंट हुआ था। ब्रेन डेड होने के बाद उसके पैरेंट्स ने आर्गन डोनेशन की अनुमति दी। आपरेशन थिएटर जाते वक्त सांची को कार्डियक अरेस्ट हो गया। इस वजह से सिर्फ उसकी क्रोनिया डोनेट हुई। उसी दिन पंजाब के रशपाल के आर्गन ट्रांसप्लांट किए गए। रशपाल के डोनेट अंगों ने तीन को नई जिंदगी दी, जबकि दो को रोशनी। वीरवार को पंचकूला की अनीता के आर्गन डोनेट किए गए। अनीता के दोनों किडनी ट्रांसप्लांट हुई, जबकि कोर्निया भी सुरक्षित रखी गईं। शुक्रवार को खरड़ के संदीप के अंग ट्रांसप्लांट किए गए। संदीप भी रोड एक्सीडेंट में घायल हुआ था। उसकी दोनों किडनी जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट किए गए।

करे अंगदान, मुरझाए चेहरों को दे मुस्कान
अंगदान से उन मरीजों को नई जिंदगी मिलती है, जिनके अंग किसी कारणवश खराब हो जाते हैं और वह घुट-घुटकर जिंदगी जीने को मजबूर होते हैं। पूरा परिवार परेशानी में आ जाता है। यदि अंग नहीं मिलते हैं तो उनकी समय से पहले मौत हो जाती है। भारत में अंगदान करने वालों की संख्या प्रति 10 लाख पर एक से भी कम है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि हर साल देशभर में जहां लगभग 1,75,000 लोगों को किडनी की जरूरत होती है, वहीं उपलब्धता मात्र 5000 की है।
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इन अंगों को कर सकते हैं दान
डॉक्टरों के मुताबिक मौत के बाद अंगदान करके एक व्यक्ति कम-से-कम आठ लोगों की जान बचा सकता है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सभी अंग डोनेट किए जा सकते हैं। इसके लिए परिजनों की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। ब्रेन डेड मरीज की किडनी, लीवर, फेफड़ा, पैनक्रियाज, छोटी आंत, वॉयस बॉक्स, हाथ, यूट्रस, ओवरी, फेस, आंखें, मिडल इयर बोन, स्किन, बोन, कार्टिलेज, तंतु, धमनी व शिराएं, कोर्निया, हार्ट वाल्व, नर्व्स, अंगुलियां और अंगूठे दान किये जा सकते हैं।

हर ट्रांसप्लांट हमारे मरीजों को नई जिंदगी देता है। यह ट्रांसप्लांट डोनर और उनके परिजनों के बिना असंभव है। सच में आर्गन डोनेशन के मुद्दे पर पीजीआई नई ऊंचाइयां छू रहा है। इस सफलता का श्रेय पीजीआई के टीम में शामिल हर सदस्य को जाता है।
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- डा. विपिन कौशल, नोडल आफिसर रोटो पीजीआई चंडीगढ़
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