देशद्रोह और समाज में नफरत फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए गुरप्रीत सिंह को सोहाना पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में पेश किया। पुलिस ने अदालत से आरोपी का पांच दिन का रिमांड मांगा। लेकिन, बचाव पक्ष के वकीलों के आगे पुलिस की एक दलील नहीं चली। इसके बाद अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
जानकारी के मुताबिक, सेक्टर-80 निवासी गुरप्रीत सिंह पहले एक सीनियर अकाली नेता का सेक्रेटरी भी रहा चुका है। अदालत में बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि गुरप्रीत सिंह का शाहीमाजरा में प्रिंटिंग का बिजनेस है। वह चार साल से जम्मू-कश्मीर की एक कंपनी एसके पब्लिसिटी का काम कर रहा था।
वहीं, गुरप्रीत सिंह ने उसी फर्म के आर्डर पर यह पोस्टर तैयार किए थे। उसपर लगाए गए आरोप गलत हैं। वहीं, गुरप्रीत के रिश्तेदार दविंदर पाल सिंह ने बताया कि उनके रिश्तेदार को गलत तरीके से फंसाया गया है। गुरप्रीत को पुलिस ने चार जुलाई को हिरासत में ले लिया था। उन्होंने कहा कि गुरप्रीत बिजनेसमैन है उस पर लगाए जा रहे आरोप निराधार है।
जिक्रयोग है कि सोहाना थाने की पुलिस ने गुरप्रताप सिंह, जगदीप सिंह उर्फ बाबा जग्गा सिंह, जगजीत सिंह निवासी न्यूयार्क, यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका, हरप्रनीत सिंह निवासी नानक नगर जम्मू, गुरप्रीत सिंह निवासी सेक्टर-80 मोहाली के खिलाफ आईपीसी की धारा 124ए 153ए, 153बी और 120बी के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि पंजाब में अलग-अलग स्थानों पर एतराज योग्य पोस्टर लगे हुए हैं। इन पर ‘आजादी ही हल 2020 पंजाब इंडिपेंडेंस रिफरेडम’ लिखा हुआ था।
इन पोस्टरों को लगवाने के पीछे विदेश में बैठे कुछ लोग लालच देकर गुरप्रीत सिंह को गुमराह कर रहे थे और देश के विरुद्ध इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस का मानना है कि हिन्दू-सिखों में आपसी तकरार पैदा करने और पंजाब का माहौल खराब करने के मकसद से यह पोस्टर लगाए गए थे। पुलिस ने केस दर्ज करके गुरप्रीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि बाकी आरोपी अभी फरार चल रहे हैं। जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।