ड्यूटी के दौरान कर्मचारी की मौत होने पर विभाग उसके आश्रित को नौकरी देकर मदद करता है, लेकिन चंडीगढ़ नगर निगम में मृतक आश्रितों को 10 साल से चक्कर कटवाए जा रहे हैं। एक बार सी और दूसरी बार डी श्रेणी में नौकरी के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के बावजूद मृतक आश्रितों को नौकरी नहीं मिली। लड़ाई लड़ते-लड़ते एक व्यक्ति की उम्र 42 साल हो गई। अब निगम ने उसे फायर ब्रिगेड विभाग में नौकरी देने का निर्णय लिया है, लेकिन इसके लिए उसे युवाओं की तरह अपनी फिटनेस दिखानी होगी। धनराज की तरह 7 लोग हैं जो पिछले कई साल से चक्कर काट रहे हैं।
मोहाली निवासी सुतेंद्र पाल सिंह ने बताया कि उनके पिता गुरदीप सिंह जल विभाग में कार्यरत थे। वर्ष 2012 में उनका देहांत हो गया। परिवार का मुखिया या कमाने वाले किसी व्यक्ति का चले जाना किसी सदमे से कम नहीं। ऐसे में मानवीयता दिखाते हुए विभाग उस परिवार के सदस्य को नौकरी देकर आर्थिक रूप से खड़ा रहने में मदद करता है, लेकिन दुख की घड़ी में अपने अधिकारों के लिए किसी को विभाग के चक्कर लगाना पड़े तो परिवार और टूट जाता है। मेरी बड़ी बहन है, उसके लिए लड़का भी देखना है। अब अपनी नौकरी देखूं या उसकी शादी की तैयारी करूं समझ नहीं आ रहा। अब बिना समय दिए सीधे फिजिकल के लिए कह दिया है।
नयागांव निवासी गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उनके पिता जल विभाग में कार्यरत थे। वर्ष 2014 में उनके पिता का देहांत हो गया। उनकी दादी की इच्छा थी कि कम से कम उनके सामने मेरी नौकरी लग जाए। 7 साल तक उन्होंने लगातार मुझे लेकर निगम के चक्कर लगाए, लेकिन अधिकारी फाइलों में ही उलझाते रहे। पिछले साल उनका देहांत हो गया। अब 15 दिनों के अंदर फायर ब्रिगेड में नौकरी करने की सहमति मांगी थी। इतने साल से भटककर लगा कि बस नौकरी मिल जाए। अब अचानक से फिजिकल के लिए कह दिया। अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर कम से कम थोड़ा समय तो दे देते।
हिमाचल निवासी अनूप के पिता बलदेव पेयजलापूर्ति विभाग में कार्यरत थे। वर्ष 2013 में उनका देहांत हो गया। हिमाचल से चंडीगढ़ आकर कमरा लिया और विभागों के चक्कर काटे, लेकिन कोई रास्ता निकला नहीं और खर्चा करने के लिए रुपये नहीं थे तो वह हिमाचल वापस लौट गए। उनका कहना है कि विभाग हमें समय दे और तब तक हमारी सरकारी सेवाएं रोक ले, हम फिजिकल पास न कर पाएं तो हमें हटा दे। अभी तो यह तो खानापूर्ति है।
जीरकपुर निवासी मोनू के पिता एमओएच विभाग में कार्यरत थे। वर्ष 2013 में उनका देहांत हो गया। नयागांव निवासी सनी के पिता एमओएच विभाग में कार्यरत थे। वर्ष 2013 में उनका देहांत हो गया। जरनैल सिंह के पिता चालक थे। वर्ष 2010 में उनका देहांत हो गया, इन्हें भी आज तक नौकरी नहीं मिली। पीड़ितों का कहना है कि निगम गृह सचिव के पत्र तक का जबाव देना ठीक नहीं समझता है, जबकि वहां से भी उनसे पूछा गया है। नियमों में अनुकंपा नियुक्ति के लिए कहीं भी फिजिकल कराने का प्रावधान नहीं है। इससे पहले भी बिना फिजिकल लोगों की भर्ती हुई है जो आरटीआई में हमें निगम ने जानकारी दी है।
फायर ब्रिगेड विभाग के नियमानुसार सभी का फिजिकल टेस्ट जरूरी है। इसमें छूट का कोई प्रावधान नहीं है। पुराने मामले की मुझे कोई जानकारी नहीं है, इसलिए इस पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम