चंडीगढ़। यूटी प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने वीरवार को लीज होल्ड नीति में बदलाव करने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ अब आवासीय संपत्तियों के साथ शहर की व्यावसायिक, औद्योगिक और नर्सिंग होम साइट को फ्री होल्ड किया जाएगा। उसके बाद इन संपत्तियों की नीलामी की जाएगी।
शहर में आवासीय संपत्तियों को छोड़ लगभग सभी संपत्तियों की नीलामी लीज होल्ड के आधार पर की जाती है। इसका नुकसान प्रशासन को पिछले काफी समय से उठाया पड़ रहा है, क्योंकि लीज होल्ड होने की वजह से लोग इनमें रुचि नहीं दिखाते और कई साल तक प्रशासन की व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियां बिक नहीं पाती हैं। शहर के कई इलाकों में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, नगर निगम और एस्टेट ऑफिस की संपत्तियां हैं, जो खाली पड़ी हैं और उन्हें कोई खरीदार नहीं मिला है। इसमें कई सेक्टरों में बने बूथ भी शामिल हैं। इंडस्ट्रियल एरिया की संपत्ति भी इसमें शामिल है। इस वजह से प्रशासन ने कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट और रेगुलेशन) एक्ट 1952 और चंडीगढ़ एस्टेट नियम, 2007 में बदलाव करने का फैसला लिया है। प्रशासक की मंजूरी के बाद जल्द ही इन साइट को फ्री होल्ड कर नीलामी की जाएगी। इससे प्रशासन को अच्छे राजस्व की उम्मीद है। सलाहकार धर्मपाल ने कहा कि इससे संपत्तियों को खरीदार ज्यादा मिलेंगे और लोग भी रुचि दिखाएंगे।
केंद्र सरकार को भी भेजा गया है प्रस्ताव
चंडीगढ़ प्रशासन ने इंडस्ट्रियल प्लॉट को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, काफी समय से इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है, इसलिए प्रशासन ने नई संपत्तियों की नीलामी के लिए नीति में बदलाव करने का फैसला किया है। इसके पीछे कई कारण हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को लेकर केंद्र सरकार जितनी बार रैंकिंग जारी करता है, उसमें चंडीगढ़ पीछे ही रहा है। बता दें कि चंडीगढ़ में करीब 80 फीसदी व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्ति लीज पर है।