लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (लेडार) तकनीक से भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) मैपिंग कराने वाला चंडीगढ़ देश का पहला शहर बन गया है। शहर के सभी इलाकों की हाई रेज्युलेशन तस्वीरें खींची गई हैं और एक आंकड़ा एकत्रित किया गया है। सभी विभागों और उनके प्रमुखों को इस नई तकनीक के बारे में जागरूक करने के लिए मंगलवार को सेक्टर-10 स्थित होटल माउंट व्यू में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल समेत सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों को बताया गया कि लाइट डिटेक्शन ऐंड रेंजिंग (लेडार) तकनीक से शहर की सभी सड़कों, पार्कों, इमारतों, पेड़, जंगल, खाली जगहों, तालाबों आदि की हाई रेज्युलेशन तस्वीरें ली गई हैं।
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भविष्य के लिए संजोकर रख सकते हैं तस्वीरें
अब ऐतिहासिक इमारतों की डिजिटल इमेजेज को भविष्य के लिए संजोकर रखा जा सकता है। लेजर रेंज और सेटेलाइट के कोऑर्डिनेशन से लेडार उपकरण किसी भी वस्तु की ढेर सारी थ्री डाइमेंशनल इमेज दे देता है, जिससे उस वस्तु का डिजिटल मैप भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। शहर में किसी भी इलाके में विकास कार्य को शुरू करने से पहले इस तकनीक के माध्यम से उस इलाके का थ्री डी मॉडल देखा जा सकेगा। इससे उस कार्य को बिना किसी झंझट के पूरा किया जा सकेगा।
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ऐसे काम करती है यह टेक्नॉलोजी
लेजर किरणों और सेटेलाइट के कोऑर्डिनेशन से चलने वाली इस टेक्नोलॉजी को किसी गाड़ी के ऊपर लगा दिया जाता है। यह उपकरण लेजर रेज फेंकता है और इसमें लगे कैमरे चारों ओर रोटेट करते हैं, जिससे किसी भी ऑब्जेक्ट की थ्री डायमेंशन (थ्रीडी) इमेज मिलती है। चंडीगढ़ में ये सर्वे कई साल चला, जो अब जाकर पूरा हुआ है।
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लेडार तकनीक से होंगे कई फायदे
गैर कानूनी निर्माण संबंधित सभी जानकारी मैप पर मिल सकेगी। उसे देखकर ही लोगों को नोटिस भी दिए जा सकेंगे। वहीं, अंडरग्राउंड लाइनों के बारे में जानकारी मिल जाएगी। सड़क नेटवर्क के मानचित्रण, यातायात प्रबंधन, शहरी मानचित्रण, पर्यटक प्रवाह मानचित्रण, स्कूलों/शिक्षा केंद्रों के लिए साइट उपयुक्तता विश्लेषण, स्थान के लिए सबसे तेज मार्ग की पहचान भी संभव होगी। इस प्रशिक्षण शिविर में गृह सचिव नितिन कुमार यादव, डीसी मनदीप सिंह बराड़, वित्त सचिव विजय नामदेवराव जड़े, आईएफएस देबेंद्र दलाई व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।