मुख्य आयोजक प्रो. डॉ. सोनू गोयल ने कहा कि यह चिंताजनक है कि सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के अनुसार डायबिटीज मेलिटस से प्रभावित 75 प्रतिशत भारतीय बालिग हाई ब्लडप्रेशर का भी शिकार हैं। उन्होंने पंजाब राज्य में क्षमता निर्माण, मीडिया और संचार और हितधारकों के जुड़ाव के माध्यम से उच्च रक्तचाप सेवाओं के प्रबंधन को मजबूत करने वाली परियोजना का संक्षिप्त विवरण भी दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को उन खाद्य पदार्थों को पहचाने के महत्व को समझने की जरूरत है, जिनमें फैट्स, नमक और चीनी (एचएफएसएस) की मा़त्रा काफी अधिक है।
भारत सरकार को भी एचएफएसएस खाद्य पदार्थों की आसान पहचान को बढ़ावा देने के लिए फ्रंट ऑफ पैकेज लेबलिंग (एफओपीएल) नीति को प्रभावी और तेजी से लागू करना चाहिए। इस दौरान डॉ. श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि टाइप- 2 डायबिटीज मेलिटस (टी2डी) के रोगियों में हाई ब्लड प्रेशर की रीडिंग एक आम खोज है। डायबिटीज व्यक्तियों में हाई ब्लडप्रेशर का बढ़ना न केवल उपचार रणनीति को जटिल बनाता है और हेल्थकेयर की लागत को भी बढ़ाता है।