पिछले सोमवार को चंडीगढ़ के कैंबवाला की एक 58 साल की महिला से दुष्कर्म की वारदात को अंजाम देने वाला गांव का ही ऑटो चालक अरविंद (48) दो हत्याओं के मामले में संदिग्ध बन गया है। 13 वर्ष पहले 30 जुलाई 2010 को 38 वेस्ट की रहने वाली 22 साल की एमबीए छात्रा और पिछले वर्ष जनवरी में मलोया में लगभग 40 साल की महिला से दुष्कर्म के बाद की गई हत्याओं में पुलिस उसकी भूमिका को लेकर जांच करेगी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पुलिस ऑटो चालक का डीएनए एमबीए छात्रा नेहा और मलोया में मारी गई महिला के शरीर पर मिले सीमन से मिलवाएगी। दुष्कर्म के बाद इन दोनों की हत्या एक ही व्यक्ति ने की थी। सीजेएम अदालत में एक दिन के रिमांड के बाद गुरुवार को अरविंद को दोबारा पेश कर सेक्टर- 3 थाना पुलिस ने उसका पांच दिनों का रिमांड मांगा। कहा गया कि उसके साथी की तलाश को लेकर आरोपी से पूछताछ करनी है और दो पुराने मामलों में भी उससे पूछताछ करनी है। दोनों वारदात और यह घटना एक ही प्रकार से अंजाम दी गई है। वहीं पुलिस के मुताबिक आरोपी गुमराह कर रहा है। उसने पहले अपने फरार साथी अग्वेश (26) का पता गाजियाबाद का बताया जबकि वह उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में रहता है। बता दें कि दोनों हत्याओं में पुलिस की सुई ऑटो चालकों की तरफ ही घूम रही है।
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दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने वाला अरविंद दो बच्चों का पिता है। उसकी बेटी की शादी हो चुकी है। सूत्रों से पता चला है कि आरोपी अरविंद का ऑटो उसकी पत्नी के नाम दर्ज है। इस ऑटो के कुल आठ चालान कटे हैं। यह लाल बत्ती जंप और जेब्रा क्रॉसिंग क्रॉस करने के हैं। इनमें से कुछ चालान लंबित भी हैं।
अरविंद और उसके साथी के खिलाफ बुजुर्ग से मारपीट, शारीरिक छेड़खानी, सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। बुजुर्ग को सकेतड़ी मंदिर छोड़ने के बहाने आरोपी उसे सुनसान जंगली क्षेत्र में ले गए और वारदात को अंजाम दे धमकाते हुए वहीं से फरार हो गए थे। महिला को चेहरे और शरीर के बाकी हिस्सों पर चोटें आई थीं। पीड़िता की निशानदेही पर अरविंद को पकड़ा गया था।
13 सालों से बचा हुआ है यह संदिग्ध
एमबीए छात्रा हत्या मामले में पुलिस अभी तक हत्यारोपी को नहीं पकड़ पाई है। अब जिला अपराध शाखा केस की तेजी से जांच में जुटी है और संदिग्धों की पहचान कर लगातार पूछताछ की जा रही है। जानकारी के मुताबिक घटना के बाद मृतका का एक मोबाइल फोन बेचने के लिए कॉलोनी नंबर 4 (अब ध्वस्त) की एक दुकान पर एक संदिग्ध गया था, जिसकी शिनाख्त पिछले 13 सालों से चंडीगढ़ पुलिस नहीं कर पाई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जब दुकानदार ने मृतका का मोबाइल फोन बेचा था तो दुकानदार ने उसे एक कागज पर अपना अंगूठा लगाने को कहा था। इस फिंगरप्रिंट की अभी तक कोई शिनाख्त नहीं हो पाई है। दुकानदार ने पुलिस को बताया था कि मोबाइल बेचने आए व्यक्ति ने खुद को रेहड़ी चालक बताया था। वहीं दुकानदार के मुताबिक संदिग्ध के दांत पीले पड़े हुए थे और उसके शारीरिक ढांचे और चेहरे का विवरण भी पुलिस को दिया गया था। हालांकि आधार कार्ड से जुड़ी संवेदनशील जानकारी आपराधिक मामलों में बिना अदालती आदेशों के इस्तेमाल नहीं की जा सकती। मृतका का दूसरा मोबाइल फोन डड्डूमाजरा के डंपिंग ग्राउंड में मिला था।