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चंडीगढ़ में अब फटाफट होंगे काम: प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने दिए निर्देश, सचिव अपने स्तर पर निपटा लें मामले

Wed, 06 Oct 2021 10:17 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

प्रशासक के पूर्व सलाहकार मनोज परिदा प्रशासन में सभी छोटे-बड़े फैसले खुद लेते थे। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक शक्तियों का पूरी तरह से केंद्रीकरण हो गया था। इसका असर ये हुआ कि विभागों के निदेशक से लेकर सचिव स्तर के अधिकारी किसी भी काम को करने से पहले सलाहकार की तरफ देखते थे।
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चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में सचिव स्तर के अधिकारी भी ज्यादातर आदेशों के लिए प्रशासक के सलाहकार की तरफ देखते हैं। अधिकतर अधिकारी सलाहकार के इशारे के बाद ही किसी नए काम को करते हैं। प्रशासनिक शक्तियों के केंद्रीकरण की इस प्रथा को सलाहकार धर्मपाल अब खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विभागों के सचिवों को निर्देश दिए हैं कि ज्यादातर मुद्दों को वह अपने स्तर पर ही निपटाएं।

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प्रशासक के पूर्व सलाहकार मनोज परिदा प्रशासन में सभी छोटे-बड़े फैसले खुद लेते थे। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक शक्तियों का पूरी तरह से केंद्रीकरण हो गया था। इसका असर ये हुआ कि विभागों के निदेशक से लेकर सचिव स्तर के अधिकारी किसी भी काम को करने से पहले सलाहकार की तरफ देखते थे। उनकी मंजूरी के बाद ही आदेश जारी होते थे। केंद्रीकरण का आलम ये था कि पूर्व प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की अध्यक्षता में होने वाली वॉर रूम की बैठक की प्रेस विज्ञप्ति भी पूर्व सलाहकार मनोज परिदा खुद ही तैयार करते थे और फिर जन संपर्क विभाग द्वारा उसे जारी किया जाता था। 
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इस प्रथा का नुकसान आम जनता को हुआ। बड़े पदों पर बैठे अधिकारी भी छोटे-छोटे काम के लिए सलाहकार की सहमति का इंतजार करते थे। सलाहकार की तरफ से निर्देश आने के बाद ही वह काम होते थे। अब नए सलाहकार धर्मपाल इसी प्रथा को बदलने की कोशिश में जुट गए हैं। उन्होंने कहा है कि ज्यादातर मामले सचिव स्तर पर निपटाए जाने चाहिए। इससे प्रशासन के कार्य करने की क्षमता बढ़ेगी। लोगों के कार्य जल्दी होंगे। उन्होंने बताया कि सचिवों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।

हर 15 दिन में सचिवों के साथ करेंगे बैठक  
सलाहकार धर्मपाल ने फैसला लिया है कि अब वह हर 15 दिन में सभी विभागों के सचिवों के साथ बैठक करेंगे। इसमें सचिवों को पिछली बैठक में लिए गए फैसले और उस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी। धर्मपाल ने कहा कि उन्होंने महसूस किया है कि वह बैठकों में कई दिशानिर्देश जारी करते हैं, लेकिन विभागों द्वारा उनका पालन नहीं किया जाता। न हीं उन पर कोई ठोस कार्रवाई की जाती है। इसको देखते हुए ही उन्होंने हर 15 दिन में सचिवों के साथ एक बैठक रखने का फैसला लिया है।
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रुके हुए प्रोजेक्ट व मुद्दों पर मंत्रालय के साथ करेंगे बैठक
चंडीगढ़ प्रशासन ने उन प्रोजेक्टों व मामलों की एक सूची बनाई है, जो मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिलने की वजह से अटके हुए हैं। इनमें से कुछ मामले ऐसे हैं, जो वर्षों पुराने हैं। प्रशासन ने केंद्र को एक प्रस्ताव भेजा था कि चंडीगढ़ के अधिकारी मंत्रालय के साथ बैठकर मामलों को जल्दी सुलझा सकते हैं। इस पर केंद्र ने सहमति जता दी है। अब सलाहकार धर्मपाल मंत्रालयों के साथ बैठक कर जल्द रुके हुए प्रोजेक्ट व मामलों को मंजूरी दिलाने का प्रयास करेंगे।

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