सीमावर्ती राज्य पंजाब में अपराध पर नियंत्रण के लिए सरकार ने विशेष योजना बनाई है। योजना के तहत सूबे की हर गली, नुक्कड़ और चौराहों को कैमरे की जद में लाया जाएगा। आधुनिक सीसीटीवी कैमरों को स्थापित किया जाएगा। धन की कमी न आए इसके लिए सरकार ने विशेष बजट की व्यवस्था करेगी।
देश का सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब की सुरक्षा को लेकर हमेशा ही सवाल खड़े होते रहे हैं। आंकड़ें भी कुछ ऐसा ही बयां कर रहे हैं। राज्य में अपराध के कुल मामलों में 2021 में 13 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार राज्य में महिला अपराधों में भी बढ़ता ग्राफ चिंता का विषय है।
पंजाब में 2020 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 4,838 मामले दर्ज किए गए थे। हालांकि 2019 के मुकाबले यह संख्या कम रही। 2019 में इनकी संख्या 5,886 थी। सूबे की नई सरकार ने चुनाव से पूर्व राज्य की आधी आबादी को सुरक्षित करने के लिए कई वादे किए थे। अब सरकार बनते ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पर अमल शुरू कर दिया है।
महिला सुरक्षा और दूसरे अपराधों पर नियंत्रण के लिए सुरक्षा उपायों के तहत राज्य भर में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बना रही है। इस योजना के तहत सभी 23 जिलों की हर गली, नुक्कड़ चौराहों के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
दहेज हत्या के मामले भी चुनौती
राज्य में दहेज हत्या के मामले में भी पिछले दो सालों में वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य में 2019 में दहेज हत्या के 69 मामले दर्ज किए गए थे जबकि 2020 में मामूली गिरावट आई और आंकड़ा तब भी 63 तक पहुंचा। 2021 में यह आंकड़ा 70 के पार हो गया था।
हत्याओं और आत्महत्याओं के मामलों में भी वृद्धि
पंजाब में हत्या के मामले 2019 में 679 से बढ़कर 2020 में 757 हो गए थे। इनमें 10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। राज्य में 2019 में आत्महत्या के मामलों में 25 फीसदी वृद्धि हुई थी, जबकि 2020 में यह 35 फीसदी तक पहुंच गई।