रेलवे की विजिलेंस टीम ने उक्त मामले को पकड़ा था। पूरे मामले की तफ्तीश करने के बाद इस घोटाले में संलिप्त अधिकारियों के तबादले कर दिए गए थे। इस मामले में कुछेक प्राइवेट ठेकेदार भी शामिल हैं, जिस कारण अब यह मामला सीबीआई के हवाले कर दिया गया है। इस घोटाले में संलिप्त अमृतसर का एक अधिकारी एक माह पहले ही सेवानिवृत्ति ले चुका है।
ऐसे हुआ घोटाला
सूत्रों के मुताबिक जिस ठेकेदार को ओवर हेड वायर डालने का ढाई करोड़ का ठेका दिया गया, उसने रेल डिवीजन फिरोजपुर के इलेक्ट्रिकल विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर घोटाला किया। बताया जा रहा है कि ठेकेदार सामग्री संबंधित पावर हाउस को नहीं देता था, जबकि पावर हाउस के दस्तावेजों में दर्ज करवा दिया जाता था और सामग्री का भुगतान रेलवे से ले लिया जाता था।
किसी ठेकेदार ने ही इस रेलवे विजिलेंस को इस मामले में शिकायत कर दी। विजिलेंस ने संबंधित पावर हाउस में छापेमारी की तो वहां कई खामियां मिलीं। उसके बाद विजिलेंस ने जांच शुरू की। जांच में कई एसएसई और अधिकारी लपेटे में आ गए। जिसके बाद कई के तबादले कर दिए गए। इलेक्ट्रिकल विभाग के एक अधिकारी, जिसका तबादला अंबाला किया गया, बाद में रेलवे कोच फैक्ट्री कपूरथला भेज दिया गया।