सालभर से अधिक चले किसान आंदोलन के दौरान हरियाणा में किसानों पर हजारों केस दर्ज किए गए। आंदोलन स्थगित करने के एलान से पहले सरकार व किसान संगठनों में केस वापसी और मृतक किसानों के परिवार को मुआवजा देने की सहमति बनी थी। इसपर हरियाणा सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
हरियाणा सरकार ने किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मामलों की वापसी के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। कोर्ट जा चुके केस वापस होने में समय लगेगा। राज्य सरकार किसानों की ओर से दी गई मृतकों की सूची का पुलिस सत्यापन करा रही है।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रविवार को हरियाणा निवास में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान जिन लोगों की मृत्यु हुई है, उनकी सूची किसान मोर्चा ने दी है, उसे पुलिस विभाग सत्यापित करेगा।
सभी डीसी, एसपी व संबंधित अधिकारी मिलकर रिपोर्ट तैयार करेंगे। वे बताएंगे कि कितने मुकदमे तुरंत वापस लिए जा सकते हैं। जो मुकदमे कोर्ट जा चुके हैं, उनका वर्गीकरण किया जाएगा। उन्हें अलग-अलग समय पर वापस लिया जाएगा।
264 में से संज्ञेय अपराध के चार मामले
किसानों पर 264 एफआईआर दर्ज हैं। इनमें चार संज्ञेय अपराध के मामले हैं। जिनमें पश्चिम बंगाल की युवती से दुष्कर्म, पंजाब के युवक की तड़पा-तड़पाकर हत्या इत्यादि शामिल हैं। एफआईआर में 1757 किसानों को नामजद करते हुए लगभग 48 हजार पर केस बनाए गए हैं। संज्ञेय अपराधों के केस सरकार खुद वापस नहीं ले सकती। इन्हें कोर्ट से वापस कराने का जिम्मा सरकार ने महाधिवक्ता बलदेव राज महाजन को सौंपा है। आंदोलन के दौरान हरियाणा में जान गंवाने वाले किसानों और सरकार के पास अलग-अलग आंकड़ा है।
टोल दरों में कोई वृद्धि नहीं होगी
मनोहर ने किसानों के धरने हटाने का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान आंदोलन समाप्त होने के बाद अब दर्ज मुकदमों को वापस लेने पर बातचीत चल रही है। किसान आंदोलन के कारण बंद टोल पर वसूली जल्द सुचारु हो जाएगी। टोल की दरों में कोई वृद्धि नहीं होगी।