कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा रणइंदर के खिलाफ दी शिकायत को राजनीति द्वेष से प्रेरित बताने के आरोपों को प्रदेश भाजपा प्रधान कमल शर्मा ने हास्यास्पद बताया है। उन्होंने कहा कि जिस समय रण इंदर पर केस दर्ज हुआ, यूपीए की सरकार थी। इसलिए कैप्टन को न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास रखना चाहिए।
शर्मा ने कहा कि 2011 में रणइंदर पर केस दर्ज हुआ, तब यूपीए सरकार थी, इसलिए कैप्टन को राजनीति द्वेष की बात नहीं कहनी चाहिए। चार्जशीट दायर होने के बाद से ही न्यायिक एजेंसी जांच कर रही थी। आयकर विभाग ने पाया है कि रणइंदर द्वारा दी जानकारी और शपथ पत्र गलत है।
उन्होंने कहा कि पंजाब इंट्रानेट कंपनी के नाम पर लेन-देन में रणइंदर का नाम उछला था। 2002 में कैप्टन सीएम बने तो उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय थी, अचानक मोती बाग पैलेस पर कैसे लक्ष्मी की कृपा हो गई। 2006 में लुधियाना सिटी सेंटर घोटाला सामने आया।
इसकी पूरी आशंका है कि उस घोटाले की रकम विदेशी खातों में जमा करवाई गई। एनडीए ने तो 2014 में सत्ता संभाली है, इस मामले में तो पहले से जांच चल रही है। उन्होंने कैप्टन से कहा कि वह अपनी सारी संपत्ति और विदेशी खातों की जानकारी सार्वजनिक करें।