आखिरकार कैप्टन अजय यादव ने कांग्रेस छोड़ ही दी। उन्होंने सोनिया गांधी को इस्तीफा भेज दिया है। अब वे प्रेस कांफ्रेंस में बड़ा ऐलान कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, या तो वे बीजेपी ज्वॉइन करेंगे या नई पार्टी का ऐलान करेंगे। फिलहाल ये सस्पेंस बना हुआ है। आज होने वाली प्रेस कांफ्रेंस में ही खुलासा होगा। इसके साथ ही कांग्रेस से कैप्टन का 30 साल पुराना साथ छूट गया।
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कैप्टन ने शुक्रवार को ट्विटर पर अचानक कांग्रेस छोड़ने का एलान पार्टी हलके में ही नहीं हरियाणा की राजनीति में हलचल मचा दी थी। उन्होंने एक के बाद एक तीन ट्वीट किए और खुद को पार्टी का सच्चा सिपाही बताते हुए प्रदेश प्रभारी कमलनाथ और पूर्व सीएम हुड्डा पर भड़ास निकाली। फेसबुक पोस्ट पर भी हुड्डा को आड़े हाथ लिया।
मीडिया से बातचीत में अपने ट्वीट की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि वह शनिवार को दिल्ली में प्रेस कांफ्रेस कर आगे की रणनीति का खुलासा करेंगे। अहीरवाल में कांग्रेस की राजनीति का चेहरा माने जाने वाले यादव के इस एलान के बाद से उन्हें मनाने के भी प्रयास शुरू हो गए हें।
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कैप्टन ने अपने ट्वीट में प्रदेश प्रभारी कमलनाथ की कार्यशैली पर सवाल उठाए और पार्टी में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को ज्यादा महत्व देने के साथ ही एक महीने में पार्टी हाईकमान को गुमराह करने का आरोप लगाया। कैप्टन की पार्टी छोड़ने की धमकी से हरियाणा कांग्रेस और अहीरवाल की राजनीति में खलबली मच गई।
ट्वीट के तुरंत बाद प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने कैप्टन से फोन पर बात कर उन्हें मनाने की कोशिश की। तंवर ने कहा कि उनकी कैप्टन से बात हो चुकी है। वह दिल्ली में आयोजित बैठक में नहीं बुलाए जाने से खफा हैं। उन्हें मना लिया जाएगा।
कमलनाथ से क्यों खफा हैं कैप्टन
कैप्टन अजय यादव ने छोड़ी कांग्रेस, ट्विटर पर किया ऐलान
- फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा कांग्रेस में चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए कमलनाथ ने 27 जुलाई को दिल्ली में हरियाणा के 10 सीनियर लीडरों की मीटिंग बुलाई थी। इस मीटिंग में पहले कैप्टन अजय यादव को भी बुलाया जाना तय हुआ था और उन्हें न्योता भी दे दिया गया था, लेकिन ऐन मौके पर मीटिंग का क्राइटेरिया बदलकर उनका नाम हटा दिया गया। इसे कैप्टन ने अपना अपमान समझा।
मैं वहां रहूंगा,जहां मुझे टॉप पर रखा जाएगा
कैप्टन अजय यादव ने कहा कि वह प्रदेश में कांग्रेस के वरिष्ठतम लीडर होते हुए भी टॉप 10 में भी नहीं हैं तो ऐसी पार्टी में रहने का फायदा क्या। मैं वहां रहूंगा, जहां मुझे टॉप पर रखा जाएगा।
टवीट्स में बयां किया दर्द
-‘मैंने अपनी जवानी और जिंदगी कांग्रेस के लिए दी। पार्टी के बतौर सच्चे सिपाही मैंने काम किया, लेकिन मेरे आत्म सम्मान को ठेस पहुंची है। इसलिए मैं कांग्रेस छोड़ता हूं।’
-‘मेरे पिता सच्चे कांग्रेसी थे और मैं भी नेहरू गांधी परिवार में महान आस्था रखते हैं। परंतु पार्टी में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सुप्रीम है और बाकी तुच्छ हैं।’
-मिस्टर कमलनाथ आपने एक महीने में हाईकमान को गुमराह किया है और मेरी इज्जत को कम आंका है। आपका 40 साल का अनुभव है लेकिन मैं भी पार्टी में 30 साल से काम कर रहा हूं।’
पीजीआई में गैंगरेप पीड़ित छात्रा व परिजनों से मिलने पहुंचे पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव
- फोटो : amar ujala
-पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से खींचतान। राज्यसभा चुनाव में हुड्डा खेमे के 14 विधायकों के वोट रद्द होने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होना और उन्हें ज्यादा तवज्जो मिलना।
-राव इंद्रजीत सिंह के कांग्रेस छोड़ने के बाद कैप्टन अजय सिंह यादव दक्षिण हरियाणा में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता बनना चाहते थे, लेकिन हुड्डा के कई करीबी जो विधायक और हुड्डा कैबिनेट में मंत्री थे, कैप्टन के सियासी पर कतरने में लगे रहे।
-हुड्डा के खिलाफ लगातार बयानबाजी से आलाकमान की नजरों में खटक रहे थे। पार्टी हाईकमान इसके लिए उन्हें कई बार व्यक्तिगत तौर पर फटकार चुका था।
-पार्टी के प्रदेश प्रभारी कमलनाथ की ओर से दिल्ली में बुलाई गई बैठक में न्योता देकर ऐन मौके पर नाम हटाना। यादव इसे आत्म सम्मान पर चोट बता रहे हैं।
क्या होगा अगला ठिकाना
कैप्टन के कांग्रेस छोड़ने के बाद उनका अगला ठीकाना क्या होगा, इस पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। जाट आरक्षण के मुद्दे पर सांसद राजकुमार सैनी के बयानों का समर्थन करने और अनेक मंचों पर ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण से छेड़छाड़ नहीं करने को लेकर दिए बयान से कयास लगाए जा रहे हैं कि वे सैनी के साथ एक मंच पर आ सकते हैं। चर्चा यह भी है कि कैप्टन हरियाणा समेत दिल्ली के कई भाजपा नेताओं के संपर्क में है। कुछ कांग्रेसी भी उनको मनाने की कोशिश में है, हालांकि उनके मानने की उम्मीद कम है। भाजपा में शामिल होने की बात नहीं बनती है तब वह अपना अलग दल भी बना सकते हैं।