पीयू का हिंदी विभाग छात्रों को इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित कर रहा है। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. बैजनाथ प्रसाद का कहना है कि उनके विभाग के कई युवा किताबें लिखने में रुचि रखते हैं। वे कविता व कहानियां भी लिखते हैं। उन युवाओं को ऐसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए हम आगे बढ़ा रहे हैं।
इतने पृष्ठ में लिखी जा सकती हैं पुस्तकें
विशेषज्ञों का कहना है कि साहित्य व लघु उपन्यास लिखना है तो उसके लिए 100 से 125 पृष्ठ सही माने जाते हैं। कहानी के लिए लगभग 150 पृष्ठ हों। कविता दो से तीन पृष्ठ की भी हो सकती है और अधिक की भी। विशेषज्ञों की राय है कि खुद के अनुभव को यदि सर्वजन के अनुभव बना सकें तो ही उसे लिखें।