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निजी स्कूलों का खेल : एनसीईआरटी की किताबों की कर रहे अनदेखी...निजी प्रकाशकों व चाहेतों की दुकानों से मंगवा रहे स्टेशनरी

Mon, 12 Apr 2021 04:35 PM IST
ajay kumar कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कई निजी स्कूल नोटबुक भी स्कूल के नाम की लगवाते हैं, आम नोटबुक पर होमवर्क करने की अनुमति नहीं देते। अभिभावकों ने बताया किताब-नोटबुक का एक कक्षा का बंडल उन्हें 5-6 हजार रुपए का पड़ता है। कई अभिभावक हर वर्ष शिक्षा विभाग को इसकी शिकायत करते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं की जाती है।
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फाइल फोटो।
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विस्तार
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चंडीगढ़ के निजी स्कूल सीबीएसई और शिक्षा विभाग के निर्देश के बावजूद स्कूलों में निजी प्रकाशक की किताबें पढ़वा रहे हैं जबकि सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाना अनिवार्य है। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल अपने प्रकाशकों की किताबें ही स्कूल में मंगवाते हैं, इसके साथ हर वर्ष किताबों में छोटे-मोटे बदलाव कर देते हैं। इससे बच्चा पुरानी किताबें भी इस्तेमाल नहीं कर पाता, नई किताब खरीदने की बाध्यता हो जाती है। 

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कई निजी स्कूल नोटबुक भी स्कूल के नाम की लगवाते हैं, आम नोटबुक पर होमवर्क करने की अनुमति नहीं देते। अभिभावकों ने बताया किताब-नोटबुक का एक कक्षा का बंडल उन्हें 5-6 हजार रुपए का पड़ता है। कई अभिभावक हर वर्ष शिक्षा विभाग को इसकी शिकायत करते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं की जाती है। शहर के मनचंदा बुक स्टोर एक कर्मचारी ने बताया कि इस बार किताबों और नोटबुक के मूल्य में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ हैं, एकाध किताब ही थोड़ी महंगी हुई है।
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स्कूलों में एनसीईआरटी पुस्तक से पढ़ाना अनिवार्य
सीबीएसई द्वारा 12 अप्रैल 2016, 19 अप्रैल 2017 और 9 अगस्त 2017 को एक सर्कुलर जारी किया गया था। इसके अनुसार सभी स्कूलों में (जो सीबीएसई से मान्यता प्राप्त) एनसीईआरटी की पुस्तकों से पढ़ाना अनिवार्य किया गया था।

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13 सितंबर, 2018 को निजी स्कूलों को दिया आदेश

कोर्ट के आदेश के बाद 13 सितंबर, 2018 को जिला शिक्षा अधिकारी ऑफिस से जारी पत्र में इस बात का साफ उल्लेख है कि स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाना अनिवार्य है। इनमें वे स्कूल शामिल थे जो सीबीएसई से मान्यता प्राप्त हैं।

तीन फरवरी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी दिया आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी किए गए पत्र को वर्ष 2018 में एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल द्वारा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसे उच्च न्यायालय ने 3 फरवरी 2020 में खारिज कर दिया था और डीईओ के आदेश को बरकरार रखा था।

जांच कर जारी करेंगे निर्देश 
पहले भी विभाग की तरफ से गैर एनसीईआरटी किताबों से बच्चों को पढ़ाने पर मनाही के निर्देश दिए गए हैं। अगर स्कूलों में अभी भी निर्देश की अवहेलना की जा रही है तो जांच कर दोबारा निर्देश जारी करेंगे। - रुबिंदरजीत सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक, चंडीगढ़।

पुरानी किताबें नहीं कर सकते इस्तेमाल 
निजी स्कूल हर वर्ष किताबों में छोटे मोटे बदलाव कर देते हैं। हम किसी बच्चे से पुरानी किताबें लेकर उन्हें इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। हर वर्ष हमें नई किताबें ही खरीदनी पड़ती है। - चंद्रप्रकाश।

एक कक्षा की किताब और स्टेशनरी पांच हजार रुपये की 
निजी स्कूल किताबों के साथ नोटबुक भी अपने ही प्रकाशकों की मंगवाते हैं। इसमें नोटबुक पर उनके स्कूल का नाम लिखा होता है। हर स्कूल की अपनी दुकानें हैं, जहां से हम किताब खरीदते हैं। किसी अन्य दुकान पर हमें किताब नहीं मिलती है। इस बार किताब और स्टेशनरी का पूरा बंडल पांच हजार रुपये से अधिक का पड़ा था। - वीरेंद्र, अभिभावक।

किताब खरीदने के लिए लगना पड़ता है लंबी कतारों में 
किताबें खरीदने के लिए सुबह ही लंबी कतार में खड़ा होना पड़ता है। निजी स्कूल गैर एनसीईआरटी की किताब मंगवाते हैं, इसलिए इसे हम ऑनलाइन या किसी अन्य किताब की दुकान से भी नहीं खरीद सकते। स्कूल की अपनी दुकान तय होती है वहीं से हमें किताब खरीदनी पड़ती है। - रुपिंदर कौर, अभिभावक।

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