पंजाब यूनिवर्सिटी से एमएससी इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री कोर्स कर रहे छात्रों ने एलान कर दिया कि वह डिग्रियां नहीं लेंगे। फाइनल ईयर के छात्रों ने कहा कि उनके कोर्स का संचालन केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के बजाय रसायन विज्ञान विभाग से करवाया जाए। उन्हें रसायन विज्ञान विभाग के जरिये ही डिग्री मिलनी चाहिए। इसके लिए छात्र पैसे और समय पीयू को देने के लिए तैयार हैं।
छात्रों ने साफ कह दिया कि कोविड के कारण तमाम लोगों की नौकरियां जा रही हैं। ऐसे में वह कैमिकल इंजीनियरिंग विभाग के जरिये संचालित कोर्स की डिग्रियां लेकर बाहर निकलेंगे तो उन्हें नौकरियां नहीं मिलेंगी। सरकारी नौकरियों में तो उनके रास्ते बंद हैं। छात्रों का आरोप है कि पीयू प्रशासन उनके भविष्य को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। वीसी, डीयूआई से लेकर कई अधिकारियों को मेल किए, लेकिन किसी का जवाब नहीं मिला।
सरकारी नौकरियों में प्रवेश नहीं, कंपनियां भी समझती हैं दोयम दर्जे
पीयू में कई वर्षों से एमएससी इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री कोर्स का संचालन कैमिकल इंजीनियरिंग विभाग के जरिये हो रहा है जबकि अन्य विश्वविद्यालयों में इस कोर्स का संचालन रसायन विज्ञान विभाग के अंतर्गत हो रहा है। पीयू से जो भी छात्र पासआउट होकर निकले हैं उन्हें सरकारी नौकरियों जैसे शिक्षा विभाग में नौकरियां नहीं मिली।
यदि वह विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में पढ़ाना चाहते हैं तो वह सरकारी नौकरी के लिए अप्लाई नहीं कर सकते। कंपनियों में भी इन छात्रों को दोयम दर्जे का समझा जा रहा है। एलुमनी भी बाजार का हाल बता चुके हैं। इसका कारण यह है कि केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के जरिये कोर्स का संचालन होना। छात्रों को केमेस्ट्री के पाठ्यक्रम की बजाय अधिकांश सिलेबस केमिकल इंजीनियरिंग का पढ़ाया जा रहा है। इसकी डिमांड बाजार में नहीं है।