बारिश और उमस की वजह से सांप बिलों से निकल आए हैं और आबादी वाली जगहों पर इनके दिखने से दहशत भी है। वन विभाग को रोज एक से दो कॉल सांप मिलने की आ रही हैं।
सबसे ज्यादा मामले रोज गार्डन, सुखना लेक, सेक्टर दो, तीन, चार, पांच, सात, धनास, खुड्डा अली शेर व सारंगपुर जैसे इलाकों से हैं। इनके आसपास जंगल या नाले और तालाब हैं।
हालांकि इस सीजन में अभी तक चंडीगढ़ में सांप को काटने का कोई मामला नहीं आया है। वन विभाग ने सांप पकड़ने के लिए गार्ड तैनात किए हैं। वे सांपों को पकड़ कर जंगल में छोड़ आते हैं। वन विभाग ने रेंज अफसरों के नंबर और दफ्तर के नंबर जारी किए हैं।
सांप दिखने पर इन नंबरों पर सूचना देकर मदद मांगी जा सकती है। चंडीगढ़ में खासकर रसेल वाइपर, कोबरा, घोड़ा पछाड़ सांप और कई जगहों से अजगर पकड़े जा रहे हैं। चंडीगढ़ में अजगर की भी तादाद अच्छी है।
रोजाना एक-दो कॉल
पर्यावरण डिपार्टमेंट की ओर से बताया गया है कि उनके कंट्रोल रूम में रोजाना एक या दो कॉल लोगों की आ जाती हैं। जैसे ही कॉल आती हैं तो तुरंत फारेस्ट गार्ड को स्पॉट पर भेज दिया जाता है। डिपार्टमेंट के गार्ड पूरी तरह से एक्सपर्ट हैं।
उनके पास सांपों को पकड़ने की स्टिक और अन्य उपकरण भी हैं। वे सांपों को पकड़कर उन्हें जंगल में छोड़ देते हैं। कई बार कॉल पुलिस के कंट्रोल में भी जाती हैं। वहां से फारेस्ट डिपार्टमेंट को सूचना दे दी जाती है। गार्ड 24 घंटे ड्यूटी पर रहते हैं।
सितंबर तक रहेगा खतरा
एक्सपर्ट का कहना है कि चंडीगढ़ में सितंबर तक सांपों के आने का सिलसिला जारी रहेगा। उसके बाद ये शीत निद्रा में चले जाएंगे। सांपों के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने ट्रैकिंग भी बंद कर दी है। पूरे जंगल एरिया में सांप ही सांप दिखने लगते हैं।