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चंडीगढ़ः इलेक्ट्रिक वाहन खरीदेंगें तो नहीं लगेगी पार्किंग फीस और रोड टैक्स में भी मिल जाएगी छूट

Tue, 04 Feb 2020 01:49 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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यूटी प्रशासन शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रमोट कर रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन चलने से पर्यावरण सुरक्षित होगा। ईंधन की भी भारी बचत होगी। शहर की खूबसूरती को बचाने के लिए सीटीयू भी अब इलेक्ट्रिक बसें चलाने जा रहा है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। इसके अलावा पार्किंग फीस माफ और रोड टैक्स में छूट जैसी कई अन्य सहूलियतें भी प्रशासन की तरफ से दी जा रही हैं।
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भविष्य को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके चलते बाजार में दिग्गज वाहन कंपनियां इलेक्ट्रिक गाड़ियां उतार रही हैं। इनमें इलेक्ट्रिक मोटर साइकिल, स्कूटर से लेकर एसयूवी तक शामिल हैं। चंडीगढ़ में जो इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदता है, यूटी प्रशासन की ओर से उसे रोड टैक्स में छूट दी जाती है। इसके अलावा पेड पार्किंग में भी इन्हें चलाने वालों से कोई शुल्क चार्ज न करने का फैसला लिया गया है। प्रशासन की तरफ से शहर में विभिन्न स्थानों पर इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन भी बनाए गए हैं।

सीटीयू ने इलेक्ट्रिक बसों के लिए टेंडर
चंडीगढ़ प्रशासन शहर में इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए हर संभव प्रयास चल रहा है। प्रशासन अपने पिछले प्रयास में सफल नहीं हो पाया है। यही कारण है कि अब प्रशासन ने शहर में किलोमीटर बेसिस पर 40 इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए दोबारा टेंडर जारी किया है। इसके लिए योग्य कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं। प्रोजेक्ट के लिए प्रशासन के अधिकारियों ने चीन जाकर भी स्टडी की थी। ट्रांसपोर्ट डायरेक्टर उमा शंकर गुप्ता ने बताया कि उन्होंने शहर में 40 इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए टेंडर जारी कर दिया है। टेंडर प्रक्रिया में चुनी गई कंपनी 10 साल तक चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिक बसें चलाएगी।
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स्मार्ट सिटी के तहत कंपनी रख सकेंगी ई-बाइक व ई-कार
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में पब्लिक बाइक शेयरिंग शुरू होनी है। इसके लिए कंपनी को टेंडर भी दिया जा चुका है। इस योजना में कंपनी साइकिल के साथ ई-बाइक व ई-कार भी रख सकेंगी। इसके लिए डॉकिंग स्टेशन पर चार्जिंग प्वाइंट भी लगेंगे। सेक्टरों से लोगों को कम से कम गाड़ी उपयोग करना पड़े, इसका भी प्रयास रहेगा। स्मार्ट सिटी के जीएम एनपी शर्मा का कहना है कि इससे शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी।

स्मार्ट कार्ड से पांच रुपये प्रति घंटा में मिलेगी साइकिल

प्रोजेक्ट के तहत पांच हजार साइकिलें शहर में चलाई जाएंगी। 670 स्थानों पर साइकिल स्टैंड बनेंगे। साइकिल का उपयोग करने के लिए हर व्यक्ति को अपना एक दस्तावेज स्टैंड पर जमा करना होगा। इसके लिए एक स्मार्ट कार्ड व ऐप भी बनाया जाएगा। स्मार्ट कार्ड से साइकिल लेने वाले लोगों को 5 रुपये प्रति घंटा के हिसाब से चार्ज होगा। जिनके पास कार्ड नहीं होगा, उन्हें 10 रुपये देने होंगे। ऐप के माध्यम से ऑनलाइन साइकिल भी बुकिंग करा सकेंगे।

साइकिल में जीपीएस के साथ ही एक नंबर प्लेट होगी। वहीं, 12 घंटे में साइकिल वापस न आने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्र्ज कराई जाएगी। यही प्रक्रिया ई बाइक व ई कार के लिए होगी। यह प्रोजेक्ट 15 साल के लिए है। देश में पहली बार एक साथ किसी शहर में इतनी बड़ी संख्या में साइकिलें लाकर प्रोजेक्ट लांच किया जा रहा है।

चंडीगढ़ की जरूरत बन गए हैं ई व्हीकल
चंडीगढ़ में प्रति हजार व्यक्ति वाहनों की संख्या काफी अधिक है। एक अनुमान के मुताबिक एक हजार लोगों पर करीब 700 वाहन है। चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या 12 लाख से ज्यादा पार हो गई। इसके साथ ही रोजाना करीब ढाई लाख वाहन दूसरे राज्यों के चंडीगढ़ में प्रवेश होते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन वाहनों में कितने लाख लीटर पेट्रोल और डीजल जलते होंगे। पेट्रोल-डीजल जलने से कार्बन का उत्सर्जन ज्यादा होता है और इससे प्रदूषण बढ़ता है। सबसे ज्यादा प्रदूषण डीजल के बसों से हो रहा है। ऐसी स्थिति में ई व्हीकल को बढ़ावा देने की जरूरत है।

शहर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा प्रदूषण वाहनों से फैल रहा है। इसके लिए प्रशासन को चाहिए कि वे ई व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए अच्छी स्कीम लेकर आएं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग प्रभावित हों और ई व्हीकल खरीद सकें। इन वाहनों के रेट भी काफी ज्यादा है। इन्हें कम करने की जरूरत है।
- राहुल महाजन, पर्यावरण विशेषज्ञ

अब कोई प्लानिंग सिर्फ चंडीगढ़ के लिए न बनाएं। हमें अब पूरे ट्राइसिटी के तौर पर इसे देखना होगा। ई-व्हीकल समय की जरूरत है। इस दिशा में हमें बढ़ना होगा और एक व्यापक प्लान बनाना होगा। इससे एयरक्वालिटी में सुधार आएगा।
- प्रो. रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर, एनवायरनमेंट स्टडीज, स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई
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इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने जा रहे हैं तो इन बातों का ध्यान रखें

आम तौर पर इलेक्ट्रिक कारें डीजल या पेट्रोल कारों से काफी महंगी होती हैं। लोगों के पास उतने ही कीमत में दूसरी पावरफुल कार खदीदने का विकल्प होता है। इसलिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले कई बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. क्या आपको जरूरत है ई-वाहन की?
ई-वाहन खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपको उसकी जरूरत है भी या नहीं। क्या आपको रोजाना कहीं जाना पड़ता है? ज्यादा दूर तक जाना पड़ता है? इलेक्ट्रिक गाड़ी को रोजाना चार्ज कर सकते हैं? जब इन सवालों को लेकर आपके जवाब साफ हो जाएं, तभी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने या न खरीदने का निर्णय लें।

2. जरूरत के अनुसार खरीदें ई-कार व बाइक
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले यह देख लें कि आमतौर पर आप एक दिन में कितनी दूरी तय करते हैं। इसके बाद यह सुनिश्चित करें कि आप जो ई-बाइक या ई-कार खरीद रहे हैं, वह आपकी जरूरत के हिसाब से कितनी दूर तक एक चार्ज में चल सकती है। फिलहाल बाजार में 60-120 किलोमीटर की रेंज देने वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर मौजूद हैं।

3. बैटरी की क्षमता जरूर चेक करें
ई-वाहन के लिए बैटरी पैक उसके सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है। यह वाहन बैटरी पैक की बिजली से चलते हैं। इलेक्ट्रिक गाड़ी की बैटरी जितने ज्यादा वॉट क्षमता की होगी, गाड़ी उतनी ज्यादा पावर और रेंज देगी। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि आप जो इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीद रहे हैं, वह वॉटरप्रूफ, शॉक प्रूफ और बैटरी रिप्लेस करने की सुविधा के साथ आता हो।

4. कंपनी की सर्विस पॉलिसी ध्यान से पढ़ें
पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियों में कोई खामी आने पर आप किसी भी मैकेनिक के पास उसे ठीक करा लेते हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ ऐसा नहीं है। इलेक्ट्रिक गाड़ी में कोई खामी आने पर इसे ठीक कराने के लिए आपको सिर्फ आधिकारिक सर्विस सेंटर पर ही जाना पड़ सकता है। ऐसे में कोई भी इलेक्ट्रिक स्कूटर या अन्य ई-वाहन खरीदने से पहले कंपनी की सर्विस पॉलिसी और वारंटी के बारे में अच्छे से जान लें।

क्यों महंगी होती हैं इलेक्ट्रिक गाड़ियां?
पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की कीमत इलेक्ट्रिक वाहनों के मुकाबले कम है। इलेक्ट्रिक वाहन के महंगे होने का सबसे बड़ा कारण ई-वाहन में इस्तेमाल होने वाली बैटरी है। बैटरी अकेले कई हजार से लाख रुपये का अंतर कर सकती है। इसके लिए महत्वपूर्ण कारण बैटरी में उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल के साथ-साथ बैटरी उत्पादन में शामिल महंगी प्रक्रियाएं हैं। ऐसे में सरकार को ऑटो कंपनियों के साथ मिलकर सस्ते इलेक्ट्रिक वाहन बनाने पर जोर देना होगा ताकि कीमत कम हो और लोगों को इन्हें अपनाने में दिक्कत न हो।
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