लद्दाख में गलवां घाटी में पटियाला के गांव सील के नायब सूबेदार मनदीप सिंह बहुत बहादुरी के साथ लड़े थे। मनदीप सिंह किसी के रोके नहीं रुक रहे थे। दुश्मन सैनिकों का खात्मा करते हुए वह लगातार आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने जिस पर भी वार किया, वह दोबारा उठ नहीं सका। मनदीप सिंह अपने दल के लीडर थे। जब चीन की ओर से हमला किया गया तो वह हिम्मत व आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने लगे।
मनदीप सिंह ने दो चीनी सैनिकों को पकड़ रखा था। तभी तीसरे ने उन पर वार कर दिया जिससे वह शहीद हो गए। बहादुरी की यह कहानी शहीद के चचेरे भाई कैप्टन (रिटायर) निर्मल सिंह ने सुनाई। इस दौरान जहां गर्व से उनकी छाती चौड़ी हो रही थी, वहीं उनकी आंखें भी नम थीं। गौरतलब है कि कैप्टन निर्मल सिंह 30 अप्रैल को सेवामुक्त होकर उसी पोस्ट से लौटे हैं, जहां मनदीप शहीद हुए हैं। निर्मल सिंह ने बताया कि उन्हें यह सब शहीद मनदीप सिंह की टीम में शामिल एक जवान ने बताया है, जो घायल अवस्था में अस्पताल में दाखिल हैं।
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गलवां घाटी में शहीद मनदीप सिंह पटियाला के गांव सील के रहने वाले थे। मनदीप सिंह तीन बहनों के इकलौते भाई थे। पत्नी गुरदीप कौर ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि पति का सपना था कि उनके बच्चे बड़े अफसर बनें लेकिन अब उनके बच्चों के भविष्य का क्या होगा।
यह कहकर वह बिलख पड़ीं। मनदीप कुछ दिन पहले ही छुट्टी काटकर लेह-लद्दाख में यूनिट 3 आर्टिलरी मीडियम में गए थे। मनदीप सिंह अपनी यूनिट में गनर इंस्ट्रक्टर (एआईजी) थे। 20 मार्च 1980 में जन्मे शहीद नायब सूबेदार मनदीप सिंह 24 दिसंबर 1997 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। मनदीप सिंह के दोनों बच्चों हैं।
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