10 साल की मेहनत के बाद लिखी गई किताब 'भगत सिंह जेल नोट बुक' का विमोचन रविवार को प्रेस क्लब में किया गया। यह उस समय की नोटबुक पर आधारित है, जो भगत सिंह ने उस समय लिखी थी, जब वे जेल में रहे। जेल में रहते समय उन के दिमाग में क्या चल रहा था? उनकी मानसिकता क्या रही? यही सब बताया गया है किताब भगत सिंह जेल नोट बुक में।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में जस्टिस अजय तिवाड़ी, जस्टिस दीपक सिब्बल, एडवोकेट जनरल पंजाब अशोक अग्रवाल, एडवोकेट जनरल हरियाणा बलदेव महाजन्र, प्रोफेसर हरीश पूरी, प्रोफेसर रोनकी राम, प्रोफेसर जसबीर सिंह मौजूद रहे। जिनकी उपस्थिति में इस किताब का विमोचन किया गया।
वहीं किताब को सम्पादित करने वाले हरीश जैन व मलविंदर जीत सिंह भी शामिल रहे। इस किताब में शहीद भगत सिंह द्वारा जेल में लिखे हुए नोट्स को शामिल किया गया है साथ में जिन किताबों व लेखकों की पंक्तीयो को लिखा है। किताब में उन का जिक्र भी किया गया है।
जो पंक्तिया अच्छी लगी उसे नोट बुक में लिखा
हरीश जैन बताते कि अपने जीवन काल में इंसान कई किताबें पढ़ता है लेकिन पूरी किताबें पढ़ने के बाद उसके मन को कुछ ही पंक्तियां प्रभावित करती हैं, जिसको वह हमेशा याद रखता है। ठीक इसी प्रकार भगत सिंह के साथ भी हुआ। उन्होंने किताबें तो बहुत पढ़ी, लेकिन जो पंक्तियां उनके मन को अच्छी लगी, उन्होंने उसको अपनी नोट बुक में लिखा।
जेल में नोट बुक मिलने के बारे में हरीश बताते है की भूख हड़ताल खत्म होने के बाद भगत सिंह को एक नोट बुक मिली, जो चार सो चार पन्नों की थी। इसी पर उन्होंने लिखना शुरू किया। इस नोट बुक के 176 पन्ने ही भरे हुए मिले, जिसे किताब का रूप दिया गया।
भतीजे को भी दी पुस्तक
हरीश ने बताया कि यह पुस्तक उन्होंने शहीद भगत सिंह के भतीजे अभय संधू को दी है। जो मोहाली में रहते है। किताब को एडिटिंग के दौरान भगत सिंह के परिवार वालों से भी मिले और उनके बारे में बहुत कुछ जाना भी। वैसे किताब को लिखने के लिए मुझे दस साल का समय लगा।
दुनिया भर की सैर
हरीश बताते है मैंने किताब को पूरा करने के लिए दुनिया भर की सैर की। अपने समय ने भगत सिंह ने कई किताबों को पढ़ा। उन्हें जिस लेखक की जो बात पसंद आई उन्होंने उसे अपने नोट बुक में लिखा। उसी नोट बुक को किताब का रूप दिया गया।
इस किताब की ख़ासियत यह है इसमें भगत सिंह ने जो लिखा वो तो है वहीं साथ में उन्होंने जिस किताब व लेखकों को पढ़ कर यह लिखा है इसमें इन सब का ब्योरा शामिल है। वहीं हरीश जैन बताते है मैंने इस किताब में उन किताबों का भी ब्योरा दिया गया है जो पुलिस द्वार भगत सिंह व उनके दोस्तों के घर में रेड के दौरान मिली थी।