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मनोज तिवारी का हमला: दिल्ली में केजरीवाल नशे को दे रहे बढ़ावा, शराब के 639 नए ठेके खोले, पंजाब में भी यही मंसूबे

Wed, 26 Jan 2022 12:16 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर मंगलवार को निशाना साधा। उन्होंने केजरीवाल पर नशे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। 
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मनोज तिवारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कुछ और ही मंसूबे हैं। वे पंजाब में भी दिल्ली की तरह नशे को बढ़ावा देने के लिए चुनाव में जीत का जोर लगा रहे हैं। दिल्ली में उन्होंने शराब के कारोबारियों से सांठगांठ कर शराब के 639 नए ठेके खोल दिए हैं। यही नहीं, शराब की बिक्री को बढ़ाने के लिए ड्राई डेज की संख्या 21 से घटाकर 3 कर दी है। भाजपा दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी ने ये बातें चंडीगढ़ में भाजपा मुख्यालय में कहीं।

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मनोज तिवारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केजरीवाल की ड्रग्स और शराब के प्रति प्रतिबद्धता उजागर हो गई है। वह पंजाब में भी नशे को बढ़ावा देने का विचार कर रहे हैं। दिल्ली में हाल यह है कि स्कूलों और धार्मिक स्थलों के सामने शराब बेचने वाली दुकानें खोल दी गई हैं। पंजाब में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में भगवंत मान का चुनाव केजरीवाल की मानसिकता को दर्शाता है।    

दिल्ली सरकार को पूरी तरह विफल बताते हुए तिवारी ने कहा कि दिल्ली में जल बोर्ड हमेशा 600 करोड़ रुपये के लाभ में चलता था लेकिन आज उसको 6200 करोड़ का भारी घाटा है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार के बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और कुशासन कर इस गड़बड़ी को जन्म दिया है। दिल्ली में व्यावसायिक उपयोग के लिए देश में सबसे महंगी बिजली दरें हैं। आम आदमी पार्टी और कुछ नहीं बल्कि झूठ और लोगों को लूटने का एक समूह है।    
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मनोज तिवारी ने चेतावनी दी कि पंजाब को पता होना चाहिए कि केजरीवाल द्वारा ‘मोहल्ला क्लीनिक’ के रूप में दिल्ली में स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा वस्तुत: अस्तित्वहीन है, क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी मई 2021 में अपने फैसले में कहा था कि ‘राज्य सरकार दिल्ली में कोविड रोगियों के लिए बुनियादी सेवाएं प्रदान करने में विफल रही है। दुर्भाग्य से हाल ही में दिल्ली में तीन बच्चों की हुई मौत के लिए दिल्ली सरकार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था जिम्मेदार थी, क्योंकि उन्हें जो दवा दी गई थी वो चार साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जानी चाहिए थी।

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