वहीं, सीनियर डिप्टी मेयर पद के मुकाबले में भाजपा-अकाली गठबंधन के उम्मीदवार हरदीप सिंह ने कांग्रेस की प्रत्याशी गुरबख्श रावत को हराया। हरदीप को 20 मत मिले, जबकि गुरबख्श रावत को महज सात मतों से ही संतोष करना पड़ा। इसके अलावा डिप्टी मेयर पद के लिए भाजपा-शिअद के गठबंधन के उम्मीदवार कंवरजीत सिंह ने कांग्रेस की रविंदर कौर गुजराल को 16 वोट से हराया।
वोटिंग से पहले कैंथ और कालिया गले मिले
मतदान से ठीक पहले मेयर ऑफिस के बाहर प्रत्याशी सतीश कैंथ और राजेश कालिया की मुलाकात हुई। दोनों एक दूसरे को देखकर हंसे और गले मिले। सदन के अंदर दाखिल होने के बाद कुछ देर के लिए दोनों एक साथ ही बैठे और आपस में कुछ बातचीत भी की। उसके बाद कालिया अपनी सीट पर जाकर बैठ गए। बाद में जीत के बाद भी दोनों गले मिले।
ये हैं पूरे आंकड़े
निगम में इस समय कुल 35 पार्षद हैं। इसमें 26 निर्वाचित पार्षद हैं जबकि 9 मनोनीत पार्षद शामिल हैं। जीत के लिए भाजपा को केवल 14 वोट चाहिए थे जबकि भाजपा के पास सहयोगी और निर्दलीय मिलाकर 22 वोट हैं। इसमें भाजपा के 20, अकाली एक और एक निर्दलीय पार्षद शामिल हैं। अगर बागी कैंथ का एक वोट अलग कर दिया जाए तो भी बीजेपी की गिनती बराबर है। क्योंकि मेयर चुनाव में एक वोट सांसद का भी पड़ता है। ऐसे में बीजेपी अपनी गिनती बराबर बता रही है, जबकि कांग्रेस के पास केवल 4 पार्षद हैं।
टंडन के पक्ष में लगे नारे.. खेर बोलीं-यही लोग कराते हैं गुटबाजी
राजेश कालिया की जीत के बाद जब उन्हें मेयर की कुर्सी पर बैठाने के लिए भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन और सांसद किरण खेर पहुंचे तो भाजपा के समर्थकों ने संजय टंडन के नारे लगाने शुरू कर दिए। काफी देर तक संजय टंडन के नारे गूंजते रहे तो किरण खेर बोल पड़ीं कि यही लोग गुटबाजी करवाते हैं। जिसको टिकट मिलेगी, उसके समर्थन में भी नारे लगेंगे। उसके बाद भी नारे लगते रहे और संजय टंडन गदगद होते रहे।
भाजपा के बागी नेता सतीश कैंथ को 11 वोट मिलने पर कांग्रेस खुश है। भाजपा से पांच पार्षदों के क्रास वोटिंग के बाद कांग्रेस का कहना है कि भाजपा पार्षदों का अपनी ही पार्टी से मोहभंग हो गया है। यही वजह है कि पार्टी के पांच पार्षदों ने पार्टी लाइन के खिलाफ वोटिंग की है। अब आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बड़ी जीत दर्ज करेगी। मेयर चुनाव संपन्न होने के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने कहा कि हम चार थे, लेकिन हमें छह वोट मिले।
सीनियर डिप्टी मेयर के चुनाव में हमें सात वोट मिले। खास बात यह है कि बीजेपी अपने पार्षदों को क्रासॅ करने से बचा नहीं सकी। यह साल 2019 की नई शुरुआत है। यह हमारे लिए बड़ी उपलब्धि है।
मेयर बनते ही कालिया ने बदलवाई कुर्सी.. कहा-मैं मेयर नहीं नगर सेवक
मेयर चुने जाने के बाद राजेश कालिया को जब मेयर की कुर्सी पर बैठने को कहा गया तो उन्होंने कुर्सी पर बैठने से इंकार कर दिया। कालिया ने कहा कि मेयर की यह कुर्सी किसी राजा की कुर्सी की तरह शाही है, जबकि मैं शहर का सेवक हूं, राजा नहीं। यही नहीं इस कुर्सी पर बैठकर मन में अहंकार आने का भी भय है। ऐेसे में मैं आम कुर्सी पर बैठूंगा।
इसके बाद मेयर की कुर्सी हटाकर दूसरी कुर्सी लगाई गई। इसके बाद ही कालिया उस कुर्सी पर बैठे। इसके बाद उन्होंने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का धन्यवाद किया और कहा कि अपने जीवन की शुरुआत उन्होंने उन्होंने डंपिंग ग्राउंड में कूड़ा उठाने से की थी और आज भाजपा पार्टी ने उन्हें महापौर के पद तक पहुंचा दिया।
राजेश कालिया ने इस दौरान अपने ऊपर लगे आरोपों का भी बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मेरे ऊपर ऐसे आरोप लगाए गए जैसे कि मैं कोई आतंकवादी हूं लेकिन विरोधियों को अब मैं अपने काम से ही जवाब दूंगा। कालिया ने दावा किया कि उनके ऊपर जो भी केस थे, उन सभी में वह बरी हो चुके हैं, किसी केस में उन्हें कोई सजा नहीं हुई है।
उन पर सिर्फ 50 रुपये का जुर्माना भर लगा है। वो भी तब जब वह मोहाली में एक लाटरी की दुकान पर काम करते थे। कालिया ने कहा कि शहर का संपूर्ण विकास ही अब उनकी प्राथमिकता है। इसके लिए वह हर नागरिक का सहयोग चाहते हैं।