उल्लेखनीय है कि अमृतपाल ने 28 सितंबर को अमृतसर के डीसी के खिलाफ डिब्रूगढ़ जेल अधीक्षक को पत्र लिखा था। इसमें लिखा था कि अमृतसर के डीसी अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके वकील राजदेव सिंह खालसा को मिलने आने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। जबकि उनके वकील ने सभी शर्तों को पूरा किया है।
अमृतपाल और उसके साथियों की डिब्रूगढ़ जेल में यह दूसरी हड़ताल है। कुछ समय पहले भी उसने जेल में भूख हड़ताल की थी। आरोप था कि उसके खाने में जानबूझ कर तंबाकू मिलाई जा रही है।
मामला होम सेक्रेटरी को भेजा: डीसी
अमृतसर के डीसी अमित तलवाड़ ने कहा कि बंदियों को उनकी इच्छा के वकील से मिलने की पूरी अनुमति है। अमृतपाल पहले एडवोकेट नवकिरन सिंह से मिल चुका है। अब वह राजदेव सिंह खालसा से मिलने की अनुमति मांग रहा है। नए वकील से मिलने देने का मामला गृह सचिव को भेजा गया है।
मानवीय अधिकारों का उल्लंघन: ज्ञानी रघबीर सिंह
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि यह जेल में बंद युवाओं के मानवीय अधिकारों का उल्लंघन है। श्री अकाल तख्त पर यह भी शिकायतें आई हैं कि देश की अलग-अलग जेलों में बंद सिख कैदियों की बीमारियों का इलाज भी सही ढंग से नही करवाया जा रहा है। जत्थेदार ने एसजीपीसी को मामले की पैरवी करने के आदेश देते हुए कहा कि इस संबंध में युवाओं और उनके पारिवारिक सदस्यों की हर तरह से मदद की जाएं।
परिवारों व वकीलों को मिलने से रोका जाना दुर्भाग्यपूर्ण: धामी
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि डिब्रूगढ़ जेल में बंद युवाओं को परिवारों व वकीलों से नहीं मिलने दिया जा रहा। उन्हें भूख हड़ताल करनी पड़ रही है। पंजाब सरकार को इस मामले पर तुरंत अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर को निर्देश जारी करना चाहिए और असम जेल में बंद सिखों के परिवारों और वकीलों को आवश्यक अनुमति देनी चाहिए।