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परगट समेत दो विधायकों को अकाली दल ने निकाला, जाएंगे आप में!

Wed, 20 Jul 2016 07:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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परगट सिंह और इंद्रबीर सिंह बुलारिया को अकाली दल ने किया सस्पेंड - फोटो : फाइल फोटो
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शिरोमणि अकाली दल ने परगट सिंह समेत दो विधायकों को पार्टी से निकाल दिया है। अब दोनों के आम आदमी पार्टी में जाने की चर्चाएं हैं। सुखबीर बादल ने मंगलवार देर शाम दो विधायकों परगट सिंह और इंदरबीर सिंह बुलारिया को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से सस्पेंड कर दिया है।
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पार्टी प्रवक्ता डॉ. दलजीत चीमा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि शिअद सुप्रीमो ने पार्टी के सीनियर नेताओं से सलाह के बाद यह फैसला किया है। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह आम आदमी पार्टी में जा सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि परगट मंगलवार को दिल्ली चले गए। उनकी वहां सिद्धू के साथ मंत्रणा भी हुई है।

चीमा ने बताया कि दोनों विधायक लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे, जिसके चलते सभी नेताओं ने इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की थी। इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई जल्द होने वाली पार्टी की कोर कमेटी की मीटिंग में तय की जाएगी।
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गौरतलब है कि बुलारिया एक जमाने में बिक्रम मजीठिया के करीबी माने जाते थे, फिर उनके संबंध बिगड़ गए। जिसके बाद उन्हें मुख्य संसदीय सचिव पद से भी हटा दिया गया। सूत्र बताते हैं कि परगट पिछले कुछ समय से आप नेताओं के संपर्क में हैं क्योंकि उन्हें भी पता है कि उनका अब शिअद में अस्तित्व नहीं है।

उनके आप ज्वाइन करने की बातचीत लगभग फाइनल हो चुकी है। परगट और उनके करीबियों ने विधानसभा चुनाव के लिए हलके पर भी मंथन शुरू कर दिया है। वह अपने पुराने हलके जालंधर कैंट के अलावा नकोदर से भी चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं।
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पार्टी से नाराज चल रहे थे पूर्व ओलंपियन

पंजाब के विधायक परगट सिंह - फोटो : अमर उजाला
परगट सिंह पिछले काफी समय से अकाली दल से नाराज चल रहे हैं। नाराजगी कई मुद्दों को लेकर है, लेकिन उनके हलके जालंधर कैंट के क्षेत्र जमशेर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने को लेकर ज्यादा नाराजगी थी। उन्होंने पहले भी पार्टी स्तर पर अपनी नाराजगी जताई।

हाल में ठुकराया था सीपीएस का पद
कुछ समय पहले सरकार ने सात मुख्य संसदीय सचिव नियुक्त किए थे। इनमें परगट का भी नाम था। लेकिन परगट ने यह पद लेने से इंकार कर दिया था। इस संबंध में उन्होंने सीएम दफ्तर में एक पत्र भी दिया। उसके बाद से अकाली दल के साथ उनकी दूरियां बढ़ती गईं।
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