अतिक्रमण रोकने के लिए प्रशासन हाईटेक तरीका अपनाने जा रहा है। प्रशासन पूरी प्रॉपर्टी का जियो सेटेलाइट मैपिंग रिकॉर्ड तैयार करेगा। इसके लिए 3 ड्रोन खरीदे जा रहे हैं। जो पूरे शहर का सर्वे कर प्रॉपर्टी की फोटो और अन्य जानकारी भेजेंगे।
इस जानकारी को जियो सेटेलाइट मैपिंग वेबसाइट से जोड़ा जाएगा। पूरे प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने सात करोड़ रुपये का बजट दिया है। महीने भर के अंदर ड्रोन खरीद लिए जाएंगे। जिसके बाद सर्वे शुरू हो जाएगा।
इस हाईटेक तकनीक को लागू करने के मामले में गृह सचिव अनुराग अग्रवाल ने मंगलवार को डीसी अजीत बालाजी जोशी के साथ मीटिंग की। जिसमें तकनीक को लागू करने पर विस्तार से चर्चा हुई। एस्टेट ऑफिस की मदद से यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
जियो सेटेलाइट मैपिंग केसाथ प्रशासन ज्योग्राफिक इंफोर्मेशन सिस्टम मैपिंग भी शुरू कर रहा है। जिसमें बिल्डिंग, ग्रीनरी, रोड और अन्य चीजों का वर्गीकरण के हिसाब से लेयर में मैप तैयार होना है। इन दोनों प्रोजेक्ट के पूरा होने पर प्रापर्टी संबंधी विवादों में कमी आएगी।
आधार से लिंक होगी प्रापर्टी
प्रापर्टी रिकॉर्ड को आधार कार्ड से भी लिंक किया जा रहा है। हरियाणा के जींद जिले के बाद चंडीगढ़ पहला ऐसा शहर है जो आधार से प्रॉपर्टी रिकॉर्ड लिंक कर रहा है। इस प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम चल रहा है।