प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वह अपनी रिपोर्ट में यह बताएंगे कि ट्रिब्यून चौक पर सिग्नल फ्री इंटरचेंज का प्रस्ताव सफल नहीं हो पाएगा। इससे एक-दो साल लोगों को कुछ राहत जरूर मिलेगी लेकिन यह पक्का रास्ता नही होगा। कुछ ही सालों बाद वहां फिर से जाम लगने लगेगा। इसलिए वह कोई पक्का रास्ता निकालना होगा। कहा कि, अगर मंजूरी मिलती है तो वह हाईकोर्ट को बताएंगे कि कैसे वह विभिन्न चरणों में फ्लाईओवर का निर्माणकार्य पूरा करेंगे।
इसके बाद वह हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे। गौरतलब है कि पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट इस फ्लाईओवर के लिए पेड़ों की कटाई करने पर रोक लगा चुका है। सैकड़ों पेड़ों के काटे जाने पर चिंता जताते हुए कहा था कि पर्यावरण एक महत्वपूर्ण मामला है। लिहाजा पहले यहां की ट्रैफिक की समस्या के लिए फ्लाईओवर के अलावा कोई अन्य विकल्प है तो उस पर भी गौर किया जाना बेहद जरूरी है, ताकि इन सैकड़ों पेड़ों को बलि दिए जाने से बचाया जा सके।
सांसद का मत, फ्लाईओवर के पक्ष में रिपोर्ट दे प्रशासन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सांसद किरण खेर चाहती हैं कि प्रशासन अपनी रिपोर्ट में साफ कहे कि उन्होंने हर तरह का सर्वे कर लिया है और ट्रिब्यून चौक पर लगने वाले जाम से निपटने के लिए फ्लाईओवर ही एकमात्र रास्ता है। हालांकि अभी तक प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने अपना रुख साफ नहीं किया है। जानकारी के अनुसार इस बारे प्रशासक से भी चर्चा की जाएगी और अगर वह भी फ्लाईओवर के पक्ष में दिखाई देते हैं तो प्रशासन फ्लाईओवर के पक्ष में रिपोर्ट कोर्ट में सौंप सकता है।
हाईकोर्ट में ट्रिब्यून फ्लाईओवर को लेकर अगली सुनवाई 26 मार्च को है। ऐसे में ट्रिब्यून फ्लाईओवर का मुद्दा एडवाइजरी काउंसिल में भी जा सकता है। अधिकारी यह भी मानकर चल रहे हैं कि प्रशासक वीपी सिंह बदनौर इस मुद्दे पर आखिरी फैसला लेने के लिए इसे एडवाइजरी काउंसिल में भी भेज सकते हैं।
इस काउंसिल में विभिन्न क्षेत्रों के लोग सदस्य हैं। ऐसी स्थिति में प्रशासन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट से और भी समय की मांग कर सकता है। बता दें कि 23 दिसंबर को प्रशासन ने यूटी गेस्ट हाउस में जन सुनवाई की थी। इस दौरान 72 लोगों ने लिखित और बोलकर सुझाव दिए जबकि 8 लोगों ने प्रेजेंटेशन के जरिए अपनी बात कही।
इसके बाद वित्त सचिव अजॉय कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक टेक्निकल कमेटी का गठन किया गया, जिसने आठों प्रेजेंटेशन को देखा। कमेटी ने 7 प्रस्तावों को रद्द कर एक तरुण माथुर के सिग्नल फ्री इंटरचेंज को विस्तृत रुप से समझने के लिए अलग से बैठक रखी। बैठक के बाद कमेटी ने उस प्रस्ताव को भी रद्द कर दिया।