पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एसिड अटैक से दोनों आंख खो चुके धुरी निवासी मलकीत सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि पंचायती समझौते से एसिड अटैक जैसे गंभीर मामले का निपटारा नहीं किया जा सकता। पुलिस यह कैसे कह सकती है कि इस मामले में पुलिस के पास सबूत नहीं है और वह जांच में कुछ नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह इस मामले को समझ कर अगली सुनवाई पर कोर्ट का सहयोग करे।
इस मामले में मलकीत ने विक्टिम्स कंपनसेशन कमेटी संगरूर के 31 मार्च 2015 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विक्टिम्स कंपनसेशन कमेटी ने उसे एसिड अटैक मामले में किसी भी तरह का मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। विक्टिम्स कंपनसेशन कमेटी की दलील थी, उसका और आरोपी का पंचायत में समझौता हो गया है, इसलिए वह मुआवजा का अधिकारी नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया कि पंचायत में समझौते के कारण दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की गई।
याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विक्टिम्स कंपनसेशन के तहत मुआवजा क्लेम करने को याची का हक माना था। कोर्ट ने कहा था कि याची को मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया था कि वह अंतरिम राहत के तौर पर याचिकाकर्ता को दो लाख रुपये अदा करे और कोर्ट बाकी मुआवजा के लिए बहस के बाद निर्णय करेगा। इसके साथ कोर्ट ने एसएसपी संगरूर से पूछा है कि उसने इस मामले में एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की।