इसके बाद उन्होंने बैंक में नौकरी करने की सोची और वर्ष 2008 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की गांव अखाड़ा स्थित शाखा में बतौर सिक्योरिटी गार्ड भर्ती होकर नौकरी करना शुरू किया था। उन्होंने बताया कि बतौर सिक्योरिटी गार्ड भर्ती होने के बावजूद वह रोजाना बैंक कर्मचारियों के साथ काम करते थे और उनका हाथ बंटाने लगे।
सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के दौरान ही बैंक की तैयारी करना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि दो वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद जब उन्होंने बैंक की परीक्षा दी। पास होने पर उन्हें क्लर्क के तौर पर पदोन्नति दी गई। इसके बाद उन्होंने चार बार शाखा प्रबंधक के लिए पीओ की परीक्षा दी। वर्ष 2021 में फिर परीक्षा दी। इस बार वह अपनी मेहनत और लगन के बलबूते सफल हासिल की और 31 मार्च 2022 को बैंक अधिकारियों ने उन्हें पदोन्नति दे दी।
जब उन्होंने बैंक में बतौर सिक्योरिटी गार्ड अपना सफर शुरू किया था तो उनका वेतन 6800 रुपये प्रति महीना था लेकिन अब शाखा प्रबंधक के तौर उनका वेतन 80 हजार रुपये प्रतिमाह से ज्यादा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की अखाड़ा गांव स्थित शाखा मे काम करने वाले अन्य कर्मचारियों रमनदीप सिंह, संदीप, सुंदर मोहन, चरणप्रीत सिंह, जसवीर सिंह अखाड़ा, रविंदर सिंह राजा, जसप्रीत कौर, लछमण सुधार, परमिंदर कौर और जगजीत सिंह जग्गा ने कहा कि हम सभी को पमरजीत सिंह मठारू के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। इंसान मेहनत व लगन के बलबूते अपनी जिंदगी में हर मुकाम हासिल कर सकता है।