अस्पतालों में एक तरफ मरीजों को खून नहीं मिल रहा, दूसरी ओर हर साल ब्लड बैंकों में हजारों यूनिट खून खराब हो रहा है। यह स्थिति चंडीगढ़ की है। आंकड़े बताते हैं कि पीजीआई, जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16 और रोटरी ब्लड बैंक में जनवरी 2022 से फरवरी 2023 के बीच 9343 यूनिट ब्लड कंपोनेंट्स नष्ट किए गए। पीजीआई समेत शहर के सभी अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में तीमारदार एक-एक यूनिट खून के लिए डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाते नजर आते हैं लेकिन ब्लड बैंकों में अव्यवस्था के चलते रक्तदाताओं का खून खराब हो रहा है। इस सच को अस्पतालों के प्रबंधनों ने भी स्वीकारा है।
आरटीआई में मांगे गए जवाब में चारों ब्लड बैंकों ने बीते 14 महीने के दौरान अपने यहां नष्ट किए गए रक्त घटकों की जानकारी उपलब्ध कराई है। इतना ही नहीं इन ब्लड बैंकों में डेंगू के सीजन में प्लेटलेट्स की भी काफी बर्बादी हुई। विशेषज्ञ इस मामले में मानकों और तकनीकी कारणों का हवाला दे रहे हैं। अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि अव्यवस्था के कारण ब्लड बैंकों में रक्त का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
चंडीगढ़ की स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह कहती हैं कि खून के कंपोनेंट्स का इस्तेमाल एक निश्चित समय के बीच ही किया जा सकता है। उनकी अलग-अलग एक्स्पायरी डेट होती है। साथ ही रक्तदान के बाद खून की जांच की जाती है। जांच में अगर खून में किसी बीमारी का पता चलता है तो उसका उपयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे में उस यूनिट को नष्ट करना पड़ता है। तकनीकी मानकों के कारण मरीज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खून के कुछ स्टॉक नष्ट करने आवश्यक होते हैं। कोशिश यही रहती है कि रक्तदाताओं से मिले खून का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा मरीजों की जान बचाने में इस्तेमाल किया जाए। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि व्यवस्था में खामियां हैं। रक्त और रक्त कंपोनेंट्स का समय पर सही इस्तेमाल जरूरी है, इसके लिए कोई ठोस व्यवस्था बनानी होगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
- जीएमसीएच-32 के 12 रेफ्रीजरेटर में से तीन 14 महीने से खराब पड़े हैं
- पीजीआई में जुलाई 2022 में 217 यूनिट प्लेटलेट्स नष्ट किए गए
- रोटरी ब्लड बैंक ने अप्रैल 2022 में 127 यूनिट पैक्ड सेल नष्ट किए
- जीएमएसएच-16 में 2022 जून से अगस्त के बीच 228 यूनिट प्लेटलेट्स नष्ट किए गए जबकि इस समय डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत थी
रक्तदान से पहले होती है ये जांचें
- एचआईवी 1
- एचआईवी 2
- हेपेटाइटिस बी
- हेपेटाइटिस सी
- वीडीआरएल
- मलेरिया
खून के कंपोनेंट्स की आयु जानें
होल ब्लड - 35 दिन
लाल रक्त कोशिकाएं - 42 दिन
प्लेटलेट्स - 5 दिन
प्लाज्मा- 1 साल
क्रायोसेल- 1 साल
14 माह में कहां कितना रक्तदान (2022 जनवरी से 2023 फरवरी तक)
माह पीजीआई जीएमसीएच 32 जीएमएसएच 16 रोटरी ब्लड बैंक
जनवरी 3736 726 233 572
फरवरी 5053 1405 369 1130
मार्च 5970 1796 538 921
अप्रैल 6014 1720 583 791
मई 4666 1084 354 520
जून 5021 1374 541 604
जुलाई 5641 1486 473 641
अगस्त 5596 1365 681 680
सितंबर 6062 1985 652 821
अक्टूबर 4732 1178 738 561
नवंबर 5270 2148 522 698
दिसंबर 5146 1721 506 651
जनवरी (2023) 5566 1062 480 608
फरवरी (2023) 5033 1908 460 1138
(सभी आंकड़े यूनिट में)
कहां कितने यूनिट ब्लड कंपोनेंट्स हुए खराब
पीजीआई 3159 यूनिट
जीएमसीएच-32 2775 यूनिट
जीएमएसएच-16 1579 यूनिट
रोटरी ब्लड बैंक 1830 यूनिट
(2022 जनवरी से 2023 फरवरी तक)
पीजीआई में 800 यूनिट खून किया नष्ट
पीजीआई ब्लड बैंक में ही खून की न्यूक्लियर एसिड टेस्टिंग होती है। इस कारण हम संस्थान में भर्ती मरीजों को अपने ब्लड बैंक का ही खून देते हैं। हमारी जांच एडवांस है। जहां तक खून के नष्ट होने की बात है तो 14 महीने के दौरान यहां लगभग 800 यूनिट खून नष्ट किया गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक यूनिट रक्त से तीन से चार यूनिट रक्त कंपोनेंट्स बनाए जाते हैं इसलिए नष्ट होने वाले घटकों की संख्या तीन हजार तक बताई जा रही है लेकिन यह बात भी समझनी होगी कि पीजीआई मानकों का पालन करते हुए एक वर्ष में डेढ़ से दो लाख मरीजों को सुरक्षित खून उपलब्ध करा रहा है।
- प्रो. रत्तिराम शर्मा, प्रभारी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग, पीजीआई