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शर्मनाक: अस्पतालों में खून के लिए भटक रहे लोग, ब्लड बैंकों में खराब हो गए 9343 यूनिट रक्त कंपोनेंट्स

Tue, 11 Apr 2023 03:37 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ की स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह कहती हैं कि खून के कंपोनेंट्स का इस्तेमाल एक निश्चित समय के बीच ही किया जा सकता है। उनकी अलग-अलग एक्स्पायरी डेट होती है। साथ ही रक्तदान के बाद खून की जांच की जाती है। जांच में अगर खून में किसी बीमारी का पता चलता है तो उसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
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ब्लड बैंक
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विस्तार
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अस्पतालों में एक तरफ मरीजों को खून नहीं मिल रहा, दूसरी ओर हर साल ब्लड बैंकों में हजारों यूनिट खून खराब हो रहा है। यह स्थिति चंडीगढ़ की है। आंकड़े बताते हैं कि पीजीआई, जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16 और रोटरी ब्लड बैंक में जनवरी 2022 से फरवरी 2023 के बीच 9343 यूनिट ब्लड कंपोनेंट्स नष्ट किए गए। पीजीआई समेत शहर के सभी अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में तीमारदार एक-एक यूनिट खून के लिए डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाते नजर आते हैं लेकिन ब्लड बैंकों में अव्यवस्था के चलते रक्तदाताओं का खून खराब हो रहा है। इस सच को अस्पतालों के प्रबंधनों ने भी स्वीकारा है। 

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आरटीआई में मांगे गए जवाब में चारों ब्लड बैंकों ने बीते 14 महीने के दौरान अपने यहां नष्ट किए गए रक्त घटकों की जानकारी उपलब्ध कराई है। इतना ही नहीं इन ब्लड बैंकों में डेंगू के सीजन में प्लेटलेट्स की भी काफी बर्बादी हुई। विशेषज्ञ इस मामले में मानकों और तकनीकी कारणों का हवाला दे रहे हैं। अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि अव्यवस्था के कारण ब्लड बैंकों में रक्त का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

चंडीगढ़ की स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह कहती हैं कि खून के कंपोनेंट्स का इस्तेमाल एक निश्चित समय के बीच ही किया जा सकता है। उनकी अलग-अलग एक्स्पायरी डेट होती है। साथ ही रक्तदान के बाद खून की जांच की जाती है। जांच में अगर खून में किसी बीमारी का पता चलता है तो उसका उपयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे में उस यूनिट को नष्ट करना पड़ता है। तकनीकी मानकों के कारण मरीज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खून के कुछ स्टॉक नष्ट करने आवश्यक होते हैं। कोशिश यही रहती है कि रक्तदाताओं से मिले खून का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा मरीजों की जान बचाने में इस्तेमाल किया जाए। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि व्यवस्था में खामियां हैं। रक्त और रक्त कंपोनेंट्स का समय पर सही इस्तेमाल जरूरी है, इसके लिए कोई ठोस व्यवस्था बनानी होगी।
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महत्वपूर्ण तथ्य
- जीएमसीएच-32 के 12 रेफ्रीजरेटर में से तीन 14 महीने से खराब पड़े हैं
- पीजीआई में जुलाई 2022 में 217 यूनिट प्लेटलेट्स नष्ट किए गए
- रोटरी ब्लड बैंक ने अप्रैल 2022 में 127 यूनिट पैक्ड सेल नष्ट किए
- जीएमएसएच-16 में 2022 जून से अगस्त के बीच 228 यूनिट प्लेटलेट्स नष्ट किए गए जबकि इस समय डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत थी

रक्तदान से पहले होती है ये जांचें
- एचआईवी 1
- एचआईवी 2
- हेपेटाइटिस बी
- हेपेटाइटिस सी
- वीडीआरएल
- मलेरिया

खून के कंपोनेंट्स की आयु जानें
होल ब्लड - 35 दिन
लाल रक्त कोशिकाएं - 42 दिन
प्लेटलेट्स - 5 दिन
प्लाज्मा- 1 साल
क्रायोसेल- 1 साल

14 माह में कहां कितना रक्तदान (2022 जनवरी से 2023 फरवरी तक)
माह                  पीजीआई           जीएमसीएच 32            जीएमएसएच 16          रोटरी ब्लड बैंक
जनवरी                 3736                  726                        233                      572
फरवरी                 5053                  1405                       369                     1130
मार्च                    5970                  1796                       538                      921
अप्रैल                  6014                  1720                       583                       791
मई                      4666                 1084                       354                       520
जून                     5021                  1374                       541                       604
जुलाई                   5641                 1486                       473                       641
अगस्त                  5596                  1365                       681                       680
सितंबर                 6062                  1985                       652                        821            
अक्टूबर                4732                  1178                        738                       561 
नवंबर                  5270                  2148                        522                       698
दिसंबर                 5146                   1721                        506                      651
जनवरी (2023)     5566                   1062                        480                       608
फरवरी (2023)      5033                   1908                        460                      1138
(सभी आंकड़े यूनिट में)

कहां कितने यूनिट ब्लड कंपोनेंट्स हुए खराब
पीजीआई               3159 यूनिट
जीएमसीएच-32       2775 यूनिट
जीएमएसएच-16     1579 यूनिट
रोटरी ब्लड बैंक       1830 यूनिट
(2022 जनवरी से 2023 फरवरी तक)

पीजीआई में 800 यूनिट खून किया नष्ट
पीजीआई ब्लड बैंक में ही खून की न्यूक्लियर एसिड टेस्टिंग होती है। इस कारण हम संस्थान में भर्ती मरीजों को अपने ब्लड बैंक का ही खून देते हैं। हमारी जांच एडवांस है। जहां तक खून के नष्ट होने की बात है तो 14 महीने के दौरान यहां लगभग 800 यूनिट खून नष्ट किया गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक यूनिट रक्त से तीन से चार यूनिट रक्त कंपोनेंट्स बनाए जाते हैं इसलिए नष्ट होने वाले घटकों की संख्या तीन हजार तक बताई जा रही है लेकिन यह बात भी समझनी होगी कि पीजीआई मानकों का पालन करते हुए एक वर्ष में डेढ़ से दो लाख मरीजों को सुरक्षित खून उपलब्ध करा रहा है। - प्रो. रत्तिराम शर्मा, प्रभारी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग, पीजीआई

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देखिए! कैसे एक-एक यूनिट खून के लिए जंग लड़ रहे मरीजों के परिजन
ब्लड बैंक से नहीं मिला खून, रोता देख आया मददगार:  बेगूसराय निवासी संतोष (बदला हुआ नाम) की किडनी खराब हो गई तो पत्नी उन्हें पीजीआई लेकर आईं। डॉक्टरों ने संतोष को भर्ती कर लिया। पिछले 11 महीने से हो रही डायलिसस से खून की बेहद कमी हो गई थी। दो यूनिट खून के लिए रक्तदाता की व्यवस्था करने को कहा गया। संतोष की पत्नी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह खून कहां से ले आएं। डॉक्टरों के आगे वह खूब गिड़गिड़ाईं, पर कोई फायदा नहीं हुआ। हारकर उन्होंने खुद खून देने की इच्छा जताई। जांच हुई तो वह एनीमियाग्रस्त मिलीं। एक-दो रिश्तेदारों को फोन कर बुलाना चाहा तो खून देने के नाम पर वह भी मुकर गए। इसके बाद वह पीजीआई के बाहर गोद में बच्चे को लेकर रो रही थीं तभी एक संस्था के सदस्य की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने मदद की और दो युवकों को रक्तदान करने को पीजीआई भेजा।

पति ने मिन्नतें कीं तो दो लोगों ने खून देकर बचाई प्रसूता और बच्चे की जान: लुधियाना की दविंदर कौर (बदला हुआ नाम) को पीजीआई में प्रसव के दौरान रक्तस्राव हुआ तो डॉक्टरों ने एक बार में तीन यूनिट ओ निगेटिव खून की व्यवस्था करने को कह दिया। दविंदर के पति रक्तदान करने गए तो एक यूनिट खून ही लिया गया। अन्य की दो यूनिट की व्यवस्था करने के लिए उन्होंने लगातार चार घंटे तक अपने रिश्तेदारों को फोन किया लेकिन कोई ओ निगेटिव नहीं मिला। पीजीआई ब्लड बैंक से ही एक रक्तदान शिविर की जानकारी मिली तो वह वहां पहुंचे। संस्था के सदस्यों से मिन्नतें कीं और अपनी पत्नी और बच्चे की जान बचाने के लिए दो यूनिट खून मांगा। सदस्यों ने उसकी मदद की और अपने दो लोग उनके साथ पीजीआई में रक्तदान के लिए भेजा।

ब्लड बैंकों का केंद्रीय डाटा बेस बने
ब्लड बैंकों का केंद्रीय डाटा बेस होना चाहिए, जिससे सभी को स्टॉक की जानकारी मिलती रहे। इसकी मदद से स्टॉक में उपलब्ध खून के समय रहते उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास होना चाहिए। अगर पीजीआई ब्लड बैंक की व्यवस्था कुछ और है तो उनके मापदंडों को अन्य ब्लड बैंकों पर भी लागू करना होगा ताकि खून के स्टॉक का उपयोग न होने पर उसे समय रहते पीजीआई भेजा जा सके। - डॉ. विवेक मेल्होत्रा, सचिव, आईएमए

निगरानी के लिए कमेटी बनाई जाए
सिर्फ पीजीआई ही नहीं शहर के सभी ब्लड बैंकों में प्रतिदिन के स्टॉक और इश्यू ब्लड का ब्योरा उपलब्ध होना चाहिए। इसकी निगरानी के लिए एक कमेटी बनाई जाए जो आवंटन से लेकर उस खून के प्रयोग या वापस किए जाने व एक्स्पायरी तिथि पर नजर रख समय रहते खून की एक-एक बूंद का उपयोग कराए। - अश्वनी कुमार मुंजाल, 60 साल के बाद भी रक्तदान करने वाले

आपका खून बचा रहा जिंदगियां, रक्तदान करते रहें
एक व्यक्ति को रक्तदान के लिए तैयार करने में कई दिन लगते हैं। ऐसे में खून की बर्बादी जैसी सूचना लोगों को हतोत्साहित कर सकती है। इस संदर्भ में यह भी समझना जरूरी है कि बर्बादी सिस्टम की लचर व्यवस्था से हो रही है या तकनीकी व क्लीनिकल कारणों से। मैं रक्तदाताओं से अपील करता हूं कि वे रक्तदान करने का क्रम जारी रखें। उनके एक यूनिट खून से तीन से चार जिंदगियों को बचाया जा सकता है। - राकेश कुमार संगर, श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट

सिस्टम को सुधारने की है जरूरत
ग्यारह साल पहले भी इस पर मैंने काम किया था। उस दौरान भी स्थिति खराब थी। उम्मीद थी कि इतने सालों बाद सुधार हुआ होगा लेकिन इस बार भी घोर निराशा हुई है। हमारा उद्देश्य ब्लड बैंकों में खराब हो रहे खून जानकारी से रक्तदाताओं को हतोत्साहित करना कतई नहीं है। हम तो सिस्टम में सुधार का प्रयास कर रहे हैं। सिस्टम की खराबी के कारण एक साल में 9 हजार यूनिट खून का बर्बाद होना वाकई चिंता का विषय है। इस पर स्वास्थ्य विभाग को गंभीर होने की जरूरत है। -आरके गर्ग, आरटीआई कार्यकर्ता
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