मीटिंग के दौरान जानकारी दी गई कि पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के पूर्व प्रमुख डॉ. राजेश कुमार ने कोविड वैक्सीन के असरदार होने की निगरानी के लिए किए गए अध्ययन के मुताबिक यह पाया गया है कि कोविड वैक्सीन से संक्रमण में 95 प्रतिशत तक, अस्पताल में दाखिल होने में 96 प्रतिशत तक और मौतों में 98 प्रतिशत तक की कमी आई है।
राज्य में वैक्सीन के लिए कुल योग्य जनसंख्या 2,16,03,083 है। अप्रैल-जून, 2021 के दौरान कोविन एप के मुताबिक कोविड पॉजिटिव मामलों की संख्या 3,16,541 थी, जिसमें से 1.8 प्रतिशत लोगों को एक डोज लगी थी, 0.4 प्रतिशत को पूरी डोज लगी थी और 80.1 प्रतिशत टीकाकरण रहित थे। 17.7 प्रतिशत के टीकाकरण संबंधी स्थिति की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पंजाब में प्रतिदिन 60 हजार कोविड टेस्ट करने का आदेश
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य में कोविड टेस्ट बढ़ाकर कम से कम 60,000 प्रतिदिन करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को लुधियाना और फरीदकोट में बच्चों के कोविड वार्ड और पीएसए ऑक्सीजन प्लांटों का वर्चुअल उद्घाटन किया। कोविड की संभावित तीसरी लहर को लेकर राज्य की तैयारियों का जायजा लेते हुए कैप्टन ने स्वास्थ्य विभाग को सरकारी और निजी अस्पतालों के ओपीडी मरीजों के लिए, यात्रियों के प्रवेश स्थलों, सरकारी दफ्तरों, उद्योग और लेबर कालोनियों, मैरिज पैलेसों, रेस्टोरेंट, पब, बार, जिम आदि के स्टाफ की टेस्टिंग को प्रमुखता से शुरू करने का आदेश दिया।
लुधियाना के सिविल अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए कोविड पीडियाट्रिक वार्ड (पीआईसीयू) में 5 पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट और बच्चों में मल्टीसिस्टम इन्फलेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएससी) के आठ बेड मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने एलान किया कि सभी जिलों में सरकार द्वारा पीआईसीयू और दूसरे दर्जे के पीडियाट्रिक बेड और चार जीएमसीएच में पीडियाट्रिक बेड 1,104 तक बढ़ाए जाएंगे।
कोविड इमरजेंसी पैकेज-2 के तहत 1000 करोड़ खर्च कर रही सरकार
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों को कोविड की तीसरी लहर का सामना करने के लिए स्वास्थ्य ढांचा और चिकित्सा आपूर्ति को मजबूत करने को कहा। कोविड इमरजेंसी पैकेज-2 (ईसीआरपी) और 15वें वित्त कमीशन की अनुदान व संकट प्रबंधन फंड के अंतर्गत पंजाब सरकार इस उद्देश्य के लिए मौजूदा वर्ष में 1000 करोड़ से और ज्यादा खर्च कर रही है।
कोविड इमरजेंसी पैकेज के अंतर्गत 331.48 करोड़, जो केंद्र के 60 फीसदी हिस्से और राज्य के 40 फीसदी हिस्से के अनुपात में है, सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में पीडियाट्रिक इलाज इकाइयों की स्थापना के लिए खर्च किए जा रहे हैं।