इस बार की दिवाली बीते वर्षों की तुलना में सुरक्षित रही, क्योंकि पटाखों से घायल होकर अस्पताल पहुंचने वालों की संख्या कम रही। इस दिवाली पीजीआई में 15 और जीएमएसएच-16 में 24 घायल उपचार कराने पहुंचे। पिछले दो वर्षों में यह आंकड़ा क्रमश: 11, 104 और 27 और 17 का था।
प्रशासन का मानना है कि पटाखों पर प्रतिबंध से काफी राहत रही। वहीं, जीएमसीएच-32 में 24 घंटे के भीतर 21 घायलों को लाया गया। इनमें से चंडीगढ़ के चार, पंजाब के 11 और हरियाणा के तीन केस हैं। 20 घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि एक घायल भर्ती है।
पीजीआई एडवांस आई सेंटर के प्रमुख प्रो. एसएस पांडव ने बताया कि 24 घंटे के दौरान पटाखों के कारण घायल हुए कुल 15 लोगों को एडवांस आई सेंटर लाया गया। इनमें 13 पुरुष और 2 महिलाएं हैं। इनमें से 6 बच्चे हैं। उनमें सबसे छोटा बच्चा आठ साल का है। घायल होने वालों में 10 लोग ऐसे हैं, जो दूर से आतिशबाजी देख रहे थे जबकि पांच खुद पटाखे चला रहे थे। घायलों में ट्राइसिटी (चंडीगढ़-3, मोहाली-2) से 5 मरीज हैं जबकि 10 घायल में पंजाब (4), हरियाणा (4), हिमाचल (1) और राजस्थान (1) के हैं।
इनमें से 12 घायलों को सर्जरी के लिए रेफर किया गया है। इनमें से 9 को गंभीर ओपन ग्लोब इंजरी है जबकि 3 रोगियों को मामूली सर्जिकल प्रक्रियाओं की आवश्यकता है। सभी मरीजों को एकतरफा चोटें आई हैं। नौ रोगियों का पहले ही ऑपरेशन किया जा चुका है और 3 की वर्तमान में सर्जरी चल रही है।
एडवांस ट्रॉमा सेंटर में भी झुलसे 3 मरीजों की रिपोर्ट आई है। इनमें से 26 वर्षीय सिद्धार्थ नाम के एक मरीज को नेहरू अस्पताल के ब्लॉक ए के बर्न वार्ड में लगभग 25 प्रतिशत बर्न (सीने और हाथ शामिल) में भर्ती कराया गया है। अन्य दोनों मरीजों को मामूली चोटें आई हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
वहीं, प्लास्टिक सर्जरी विभाग में दो घायलों को गंभीर स्थिति में भर्ती किया गया है। मोमबत्तियां जलाते समय दो रोगियों को गंभीर थर्मल बर्न (25 प्रतिशत और 70 प्रतिशत) का सामना करना पड़ा। बर्न आईसीयू में इन दोनों मरीजों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। एक अन्य व्यक्ति के हाथ में पटाखा चलने से गंभीर चोटें आई है। इसी तरह पटाखों के फटने से एक मरीज की जांघ और हाथ में गहरी जलन हुई। ये दोनों मरीज भी निगरानी में हैं और इनकी भी सर्जरी की जाएगी।
वहीं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दिवाली की रात जलने से दुर्घटनाग्रस्त हुए 24 घायलों को इमरजेंसी में लाया गया, जिनमें से आंख में चोट संबंधी चार मामले थे। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। जबकि सड़क किनारे दुर्घटनाग्रस्त होकर 37 लोग अस्पताल पहुंचे।