पावरकॉम से 7 सालों से हर महीने बैंक में जमा होती थी पेंशन
संवाद न्यूज एजेंसी
जगरांव। पावरकॉम विभाग से रिटायर होने के बाद पक्के तौर पर कनाडा में रहने रहे एनआरआई के बैंक खाते से 7 सालों की पेंशन 46 लाख रुपये गायब हो गए। इस संबंधी पता चलते ही बैंक अधिकारियों से बात की गई, तो बैंक अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की। इसके बाद पीड़ित ने दुखी होकर पुलिस को शिकायत दर्ज करवा दी।
पुलिस ने मामले की जांच आगे डीएसपी सिटी को करने के आदेश जारी कर दिए। पीड़ित ने शिकायत में बैंक कर्मियों पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं। इसे लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी। इस मामले संबंधी जानकारी देते हुए पीड़ित बलवंत सिंह पुत्र लाल सिंह निवासी गांव हेरा ने बताया कि वह पॉवरकॉम विभाग में बतौर जेई रिटायर हुआ था। उसका बैंक खाता एसबीआई सुधार ब्रांच में चल रहा था। उसी बैंक खाते में उसकी हर महीने पेंशन जमा होती थी। वह 2017 में कनाडा चला गया। इसके बाद उसके बैंक खाते में हर महीने पेंशन जमा होती रहती थी। अब वह 24 अप्रैल 2024 को भारत में अपना इलाज करवाने के लिए आया था। जब वह बैंक में अपने खाते की जानकारी लेने के लिए स्टेटमेंट लेने गया, तो पता चला कि उसके बैंक खाते से हर महीने पैसे निकाले जा रहे हैं। जबकि उसने कभी बैंक से पैसे नहीं निकाले। सात सालों में उसके खाते में 46 लाख रुपये थे, जोकि अब मात्र 20 हजार के करीब ही बैंक खाते में हैं। पीड़ित ने कहा कि उसके खाते से पैसे गायब होने के पीछे बैंक कर्मियों का हाथ है, क्योंकि बिना मिलीभगत इतनी बड़ी रकम बैंक से अपने आप गायब नहीं हो सकती। इतना ही नहीं जब उन्होंने बैंक खाते की जांच की तो उसके बैंक खाते में मोबाइल नंबर पता नहीं किस का लिंक कर रखा है। जबकि उसने बैंक वालों को कभी मोबाइल नंबर दिया ही नहीं था। इस संबंधी एसएसपी दफ्तर में शिकायत दर्ज करवाई गई है, जिसकी जांच डीएसपी सिटी जसजोत सिंह को करने के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथ हुई ठगी के कारण वह दिमागी तौर पर इतने परेशान हो गए कि अब उन्हें डिप्रेशन की दवा भी लेनी पड़ रही है। वहीं, शिकायत मिलने के बाद इस मामले की पुलिस ने जांच शुरू कर दी, जल्द ही इस मामले में खुलासा होगा।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
पीड़ित ने बताया कि वह कनाडा ने पक्के तौर पर रह रहा है। अब वह अपना इलाज करवाने के लिए भारत आया था। उसे पैसों की जरूरत थी, जब वह बैंक में अपने खाते से पैसे निकालने गया, तो उसके पैरों तले जमीन निकल गई। जब बैंक खाते में 46 लाख रुपये की जगह सिर्फ 20 हजार रुपये थे। जब उसने बैंक वालों से बात की तो उन्होंने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि आप के द्वारा ऑनलाइन बैंकिंग के जरिये अलग-अलग बैंक खातों में रुपये ट्रांसफ़र किए गए हैं। जबकि उन्हें ऑनलाइन सिस्टम चलाना ही नहीं आता न ही उन्होंने कभी बैंक से एटीएम लिया न ही कभी चेक बुक। उन्होंने बताया कि बैंक कर्मियों द्वारा ही किसी और का मोबाइल नंबर उसके खाते के साथ लिंक कर रखा है, जबकि उसने अपना कोई मोबाइल दिया ही नहीं था।