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धोखेबाज NRI पतियों के खिलाफ 40 हजार महिलाओं ने फूंका बिगुल, दिल्ली चंडीगढ़ में जुटेगी पीड़िताएं

Sat, 22 Sep 2018 04:02 AM IST
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सुमेरा पारकर
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धोखा देकर शादी रचाने के बाद विदेश भाग चुके पतियों के खिलाफ पीड़ित पत्नियों ने सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाया है। देश भर की 40 हजार महिलाएं सरकार के तमाम दरवाजों से निराश होकर अब एक मंच पर आई हैं। दिल्ली और चंडीगढ़ में अक्तूबर में होने वाले मेगा सम्मेलन में ये महिलाएं सरकार को जगाने का बिगुल फूंकेंगी।

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एनआरआई पतियों से पीड़ित 40 हजार महिलाओं में 23 हजार से अधिक पंजाब की हैं जबकि करीब 6500 हरियाणा और चंडीगढ़ व दो हजार उत्तर प्रदेश की महिलाएं हैं। इनके अलावा महाराष्ट्र, बिहार, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली, आंध्रप्रदेश आदि प्रदेशों की पीड़ित महिलाएं भी इस लड़ाई में शामिल हैं। 

ऐसे चली संघर्ष की कहानी
बात 2016 की है। हिमाचल प्रदेश के पालमपुर की ऋतु शर्मा ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया। अपनी और कई एनआरआई पतियों से पीड़ित महिलाओं की कहानी बताई। उसी दौरान पुणे की सुमेरा पारकर ने भी विदेश मंत्री को ट्वीट किया। जवाब कुछ नहीं मिला। इंतजार के बाद ऋतु शर्मा व सुमेरा ने ऐसी पीड़ित महिलाओं को ट्विटर व वाट्सएप के जरिये आमंत्रित किया। 150 महिलाओं का जवाब आया।
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वह भी पतियों की पीड़ा से आंसू बहा रही थीं। इनकी संख्या बढ़ी तो ऋतु व सुमेरा का हौंसला और बढ़ गया। उन्होंने नेशनल कमीशन फॉर वुमन की चेयरमैन रेखा शर्मा ने संपर्क साधा। सरकार के साथ बैठक कराने की मांग रखी। बात तय हो गई। 28 मार्च 2018 को पूरे कोरम से बैठक हुई। विदेश मंत्रालय, महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय, एनआरआई कमीशन के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

ऋतु, सुमेरा के अलावा साउथ की फरहीन, व सैलजा के पिता रामाराव, उत्तर प्रदेश के बरेली की पीड़ित जसमीत के भाई अमरजीत आदि भी पहुंचे। बैठक हुई, मदद का आश्वासन मिला लेकिन किसी निर्णय तक नहीं पहुंच पाए

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दौड़ पड़ा टू गेदर वी कैन

ऋतु वर्मा
इसकेबाद ऋतु शर्मा व सुमेरा पारकर ने बिना हारे माने अपना नेटवर्क बढ़ाना शुरू कर दिया। कुरुक्षेत्र निवासी रीना चौहान, इसी प्रदेश की कोमल मदान, पंजाब के मानसा की अमृत पाल कौर, बठिंडा की रूपाली गुप्ता, मुंबई की समायरा, दिल्ली की शिवानी आदि संपर्क र्में आईं। ऋतु शर्मा ने अप्रैल 2018 में टू गेदर वी कैन नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। 

ऋतु  शर्मा 14 नाम से ट्विटर अकाउंट बनाया। देखते ही देखते अगस्त माह तक लगभग 40 हजार महिलाएं जुड़ गईं। पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ के पीड़ितों की मदद का जिम्मा रीना चौहान, अमृत पाल, कोमल मदान को दिया गया। बाकी महिलाओं को भी अन्य प्रदेशों में जिम्मेदारियां सौंपी गईं। सोशल मीडिया पर महिलाओं को मंच मिल गया। पतियों को सबक सिखाने के लिए उन्होंने पासपोर्ट रद्द करवाने शुरू कर दिए। पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ समेत पूरे देश में तीन हजार से अधिक एनआरआई पतियों के पासपोर्ट ये रद्द करा चुकी हैं। अब लड़ाई सजा दिलवाने की है। 

इन्होंने बढ़ाया हौसला
तत्कालीन क्षेत्रीय पारपत्र अधिकारी चंडीगढ़ परमजीत सिंह (आईपीएस) से पीड़ित महिलाओं ने संपर्क किया। उन्होंने सुझाव दिए। सही रास्ता भी दिखाया। अभी भी वह महिलाओं की मदद कर रहे हैं। एनआरआई कमीशन के चेयरपर्सन राकेश गर्ग ने भी मदद की। इसी तरह वर्तमान क्षेत्रीय पारपत्र अधिकारी शिबास कबिराज (आईपीएस) भी उनके मार्गदर्शक बने। सुबूत महिलाओं ने पेश किए तो उनके पतियों के पासपोर्ट रद्द किए।

रही अच्छी भूमिका, मिलती गई सफलता
ऋतु शर्मा, सुमेरा, रीना चौहान के अलावा अमेरिका के सेल्टर होम में निवास कर रही आंध्र प्रदेश की हरिता कौला ने भी महिलाओं के हित में अच्छी भूमिका अदा की। इसी तरह दिल्ली की शिवाली, स्मिता, बिहार के पटना निवासी सुजाता, पंजाब की सतविंदर कौर, साउथ इंडिया की रतिका, सुहानी, उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद की जसमीत कौर, इसी प्रदेश के लखनऊ निवासी जूबी जायद, चंडीगढ़ की अभिलाषा, हरियाणा की रेनू, भटिंडा की रूपाली, महाराष्ट्र की उर्वशी ने भी बेहतर काम किया। यह खुद पीड़ित हैं। यह अपने-अपने क्षेत्रों में पीड़ित महिलाओं की मदद भी कर रही हैं। कुछ ने अपना संगठन भी खड़ा किया।

ऋतु शर्मा की आप बीती
हिमाचल प्रदेश के पालमपुर की ऋतु शर्मा की शादी 6 मई 2013 में संजय सिंह से हुई। वह अटलांटा पुलिस में हैं। शादी के एक माह तक वह ऋतु के साथ रहे लेकिन उसकेबाद वह अमेरिका चले गए। 17 माह बाद आए मगर कुछ दिन में ही चले गए। चार साल बीत गए पर कोई खबर नहीं है। इसके बाद ऋतु ने पति को सबक सिखाने के साथ ही अन्य पीड़ितों को भी न्याय दिलाने का संकल्प लिया। 

पीएचडी कर रही ऋतु कहती हैं, किसी ने साथ नहीं दिया तो महिलाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से एक किया है। अब अक्तूबर में चंडीगढ़ व दिल्ली में सम्मेलन होगा। इसकी रूपरेखा तैयार हो रही है। तिथि अभी तय की जा रही है। एनआरआई पतियों के खिलाफ कठोर एक्ट बनाने की मांग की जाएगी ताकि भविष्य में कोई लड़की ऋतु, सुमेरा, रीना की तरह पीड़ित न बन पाएं।

रीना चौहान की कहानी
हरियाणा के कुरुक्षेत्र की रीना चौहान की शादी उसी क्षेत्र के राहुल से 25 नवंबर 2012 को हुई थी। पति हरियाणा पुलिस में नौकरी कर रहे थे लेकिन कुछ समय बाद वह अमेरिका चले गए। उसके बाद नहीं लौटे। संपर्क अब तक नहीं किया। हर दर पर रीना ने न्याय मांगा लेकिन नहीं मिला। उसके बाद जाकर पति का पासपोर्ट रद करवाया और अब आगे सजा दिलाने की तैयारी कर रही हैं। 

कहती हैं कि आरपीओ शिबास कबिराज ने उनकी मदद की है। उन्होंने कार्यालय में एक कक्ष दिया है। वहां पीड़ित महिलाएं आकर अपनी बात रख रही हैं। प्रथम कार्रवाई करवाने के लिए महिलाओं ने पतियों के खिलाफ सुबूत पेश किए। उसी आधार पर आरोपी एनआरआई पतियों के पासपोर्ट रद किए जा रहे हैं।

एनआरआई पतियों के पासपोर्ट उन पर चल रहे केस केआधार पर रद्द किए जा रहे हैं। पीड़ित महिलाएं न्याय के लिए आगे बढ़ रही हैं। विभाग से जो मदद होगी वह दी जा रही है। - शिबास कबिराज, क्षेत्रीय पारपत्र अधिकारी चंडीगढ़
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