धोखा देकर शादी रचाने के बाद विदेश भाग चुके पतियों के खिलाफ पीड़ित पत्नियों ने सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाया है। देश भर की 40 हजार महिलाएं सरकार के तमाम दरवाजों से निराश होकर अब एक मंच पर आई हैं। दिल्ली और चंडीगढ़ में अक्तूबर में होने वाले मेगा सम्मेलन में ये महिलाएं सरकार को जगाने का बिगुल फूंकेंगी।
एनआरआई पतियों से पीड़ित 40 हजार महिलाओं में 23 हजार से अधिक पंजाब की हैं जबकि करीब 6500 हरियाणा और चंडीगढ़ व दो हजार उत्तर प्रदेश की महिलाएं हैं। इनके अलावा महाराष्ट्र, बिहार, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली, आंध्रप्रदेश आदि प्रदेशों की पीड़ित महिलाएं भी इस लड़ाई में शामिल हैं।
ऐसे चली संघर्ष की कहानी
बात 2016 की है। हिमाचल प्रदेश के पालमपुर की ऋतु शर्मा ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया। अपनी और कई एनआरआई पतियों से पीड़ित महिलाओं की कहानी बताई। उसी दौरान पुणे की सुमेरा पारकर ने भी विदेश मंत्री को ट्वीट किया। जवाब कुछ नहीं मिला। इंतजार के बाद ऋतु शर्मा व सुमेरा ने ऐसी पीड़ित महिलाओं को ट्विटर व वाट्सएप के जरिये आमंत्रित किया। 150 महिलाओं का जवाब आया।
वह भी पतियों की पीड़ा से आंसू बहा रही थीं। इनकी संख्या बढ़ी तो ऋतु व सुमेरा का हौंसला और बढ़ गया। उन्होंने नेशनल कमीशन फॉर वुमन की चेयरमैन रेखा शर्मा ने संपर्क साधा। सरकार के साथ बैठक कराने की मांग रखी। बात तय हो गई। 28 मार्च 2018 को पूरे कोरम से बैठक हुई। विदेश मंत्रालय, महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय, एनआरआई कमीशन के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
ऋतु, सुमेरा के अलावा साउथ की फरहीन, व सैलजा के पिता रामाराव, उत्तर प्रदेश के बरेली की पीड़ित जसमीत के भाई अमरजीत आदि भी पहुंचे। बैठक हुई, मदद का आश्वासन मिला लेकिन किसी निर्णय तक नहीं पहुंच पाए