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बॉलीवुड गायिका इंदिरा नाईक ने कहा- ट्रेडीशनल संगीत को सहेजना आज की जरूरत

Sat, 22 Sep 2018 12:58 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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बॉलीवुड गायिका इंदिरा नाईक
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अब जरूरत है ट्रेडीशनल संगीत को सहेजने की। बॉलीवुड की धुने हों या फिर एलबम और रीजनल संगीत, सभी में एक तरह का शोर सुनाई देता है। मैं यह नहीं कह रही हूं कि ऐसे आर्टिस्ट नहीं हैं। आर्टिस्ट हैं पर उनको आगे आने का मौका नहीं मिलता है। यह कहना है बॉलीवुड की गायिका इंदिरा नाईक का। इंदिरा नाइक चंडीगढ़ में नार्थ जोन कल्चरल सेंटर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने आईं थीं।

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उन्होंने कहा कि अभी भी पुराने गीतों को सुनने का आनंद एकदम अलग है। इसकी वजह है कि वह गीत दिल से जुड़े होते हैं। सिर्फ वाद्य यंत्रों की तेज आवाज को आप संगीत का नाम नहीं दे सकते। म्यूजिक तो वह है जो कि सुकून दे। बॉलीवुड की फिल्मों में चेंज आ चुका है। लिखने वाले हैं पर उसको स्वीकार करने वाले डायरेक्टर या प्रोड्यूसर नहीं हैं। कारण यह नहीं है कि आडियंस इसको स्वीकार नहीं करेगी। ऐसा होता तो शायद महेश भट्ट की म्यूजिकल फिल्में हिट नहीं होतीं। पहले डायरेक्टर म्यूजिक भी सीखते थे और गायकों को समझते भी थे पर अब ऐसा नहीं होता है।

नामी सीरियल की आवाज हैं इंदिरा

बॉलीवुड गायिका इंदिरा नाईक
अब रियलटी शो की बात करें तो मैं भी वर्ष 1996 में सारेगामापा में विजेता थी। अब मैं ज्यादा शो नहीं देखती। उसकी वजह है ज्यादा समय नहीं होता, लेकिन ऐसे शो में ज्यादातर गीत पहले के होते हैं। यदि कुछ ऐसे नए कंपजीशन हों और गीत हों जो कि उसी मंच से निकलें और हिट हो जाएं तो शायद शो ज्यादा सुपरहिट होंगे। बता दें कि इंदिरा नाईक ने पहले पटियाला घराने के सत्यनाराणय सिंह से संगीत की शिक्षा हासिल की और उसके बाद उन्होंने स्वर्गीय मोहिंदरजीत सिंह से वोकल की ट्रेनिंग ली।

 इसके बाद उन्होंने विट्ठल राव से गजल की ट्रेनिंग लेने के साथ-साथ दयाल ठाकुर से भी वोकल का प्रशिक्षण लिया। उनके अब तक चार एलबम रिलीज हो चुके हैं। इसमें से एक भजन एलबम कृष्णा कृष्णा है। दूसरा एलबम गुजरात सुगम संगीत का है। इसके साथ ही 1998 में उनका गजल एलबम आया आप के लिए। फिर उन्होंने वर्ष 2009 में गजल एलबम तसव्वुर रिलीज किया।

इंदिरा नाईक ने कई नामी सीरियल के लिए प्ले बैक सिंगिंग की। इसमें साया, अलाप, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी, भाभी के लिए प्ले बैक सिंगिंग की। इसके साथ ही उन्होंने एमडीएच मसाला और फ्लेयर पैन के लिए काम किया। इंदिरा नाइक मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं में गाना गाया।
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पिया मिलन की आस’ सुन झूमे लोग

बॉलीवुड गायिका इंदिरा नाईक
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला द्वारा ‘लोक एवं उप-शास्त्रीय संगीत महोत्सव’ का टैगोर थियेटर में आयोजन किया गया। इस महोत्सव के दूसरे दिन मुंबई की इंदिरा नाईक ने सूफी और उप-शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी। उन्होंने ठुमरी में ‘पिया मिलन की आस’ और ‘बाजूबंद खुल-खुल जाये’ से शुरुआत की। उनकी गायकी में छोटी-छोटी तानों, मुरकियों और बहलावों का समावेश सुनते ही बना। 

उनका भाव पक्ष बेहद मजबूत था, जिसे श्रोताओं द्वारा बहुत सराहा। इसके बाद दादरा ‘बागों में पड़े झूले’ और उसके बाद ‘मैंने लाखों के बोल सहे’ पेश किया। फिर उन्होंने स्व. शोभा द्वारा गाया गया प्रसिद्ध दादरा प्रस्तुत किया। जिसके बोल थे ‘रंगी सारी गुलाबी चुनरिया’ जिसने श्रोताओं का दिल जीत लिया। उन्होंने महाराष्ट्र के कोली मछुआरों द्वारा गाया जाने वाला मराठी लोग गीत ‘मी डोलकर डोलकर कोली’ गाया। 

फिर उन्होंने लावणी ‘दिलसा गा बाई दिलसा’ पेश किया। उनके साथ तबले पर सर्वजीत सिंह, पैड पर कर्मजीत, की-बोर्ड पर डा दिनेश रहेजा, गिटार पर अमर मौजूद रहे। इस दौरान विशिष्ट अतिथि शोभा कौसर, डॉली गुलेरिया और प्रोफेसर सौभाग्य वर्धन ने इंदिरा नाइक को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। 
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