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चंडीगढ़: लीकेज और चोरी से बर्बाद हो रहा 38 फीसदी पानी, प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी की खपत से भी बढ़ी चिंता

Mon, 08 Nov 2021 11:28 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

भारत में घरेलू जल उपयोग के लिए मानक मानदंड 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन (एलपीसीडी) है, जिसे केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण इंजीनियरिंग संगठन द्वारा निर्धारित किया गया है। चंडीगढ़ में यह आंकड़ा 227 एलपीसीडी है, जो औसत के दोगुना से थोड़ा ही कम है।
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चंडीगढ़ में भूजल स्तर का दोहन अधिक। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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चंडीगढ़ शहर में कुल आपूर्ति का 38 फीसदी पानी लीकेज और चोरी के चलते बर्बाद हो रहा है। इससे नगर निगम को राजस्व में भारी नुकसान हो रहा है। प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी की खपत भी शहर में सबसे ज्यादा है। यूटी प्रशासन ने अपनी एक रिपोर्ट में इस पर चिंता जताई है। इसमें कहा गया है कि पानी के लिए ट्यूबवेल पर निर्भरता की वजह से भूजल गिरता जा रहा है, जो चंडीगढ़ के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है।

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भारत में घरेलू जल उपयोग के लिए मानक मानदंड 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन (एलपीसीडी) है, जिसे केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण इंजीनियरिंग संगठन द्वारा निर्धारित किया गया है। चंडीगढ़ में यह आंकड़ा 227 एलपीसीडी है, जो औसत के दोगुना से थोड़ा ही कम है। इसे कम करने को लेकर प्रशासन के अधिकारियों का तर्क है कि जब शहर में लोगों को 24 घंटे पानी मिलने लगेगा तो लोगों में पानी इकट्ठा करने की आदत खत्म हो जाएगी। वहीं नगर निगम को जिस 38 फीसदी पानी से राजस्व प्राप्त नहीं होता, उसे भी घटाकर 15-20 फीसदी करने की योजना है। इसके लिए प्रशासन का तर्क है कि जब 24 घंटे पानी की सप्लाई होगी तो नई व्यवस्था में फ्लो मीटर और प्रेशर गेजिस से लीकेज और चोरी पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी।  

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चार साल में ट्यूबवेल पर निर्भरता खत्म करने का दावा

25 सितंबर को हुई सदन की बैठक में नगर निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने कहा था कि लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारने की जरूरत है। चंडीगढ़ वर्तमान में गंभीर स्थिति में पहुंच रहा है। वहीं, मंत्रालय ने चेताया है कि अगर नहीं सुधार हुआ तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाएगी। मनीमाजरा पहले ही गंभीर स्थिति में है, इसलिए सबसे पहले मनीमाजरा में सातों दिन 24 घंटे पानी की आपूर्ति योजना के पायलट प्रोजेक्ट को शुरू किया जाएगा, ताकि वहां भूजल की स्थिति को सुधारा जा सके। इसके बाद पूरे शहर में सातों दिन 24 घंटे पानी की आपूर्ति योजना को लागू किया जाएगा। अगले चार साल में ट्यूबवेलों पर निर्भरता को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

38 फीसदी पानी बर्बाद होने के प्रमुख कारण
  • गांव-कालोनियों में पानी की चोरी
  • बिना मीटर के इस्तेमाल होने वाला पानी
  • लाल डोरे के बाहर पानी की खपत ज्यादा
  • पुरानी पाइप लाइंस की वजह से लीकेज
शहर में पानी की सप्लाई की पूरी व्यवस्था
जल आपूर्ति स्रोत                                                          आंकड़े

ट्यूबवेल की संख्या                                                        253
ट्यूबवेल से निकाले जाने वाला कुल पानी                       25 एमजीडी
सतही जल (भाखड़ा मुख्य नहर, कजौली)                  58 एमजीडी + 29 एमजीडी
वाटर वर्क्स की संख्या                                                      7
वाटर वर्क्स की क्षमता                                                 70.5 एमजी
जल आपूर्ति पाइप की कुल लंबाई (कि.मी.)                     1450 लगभग
पाइप से जलापूर्ति वाले घरों का प्रतिशत                         100 फीसदी
औसत जल आपूर्ति (एलपीसीडी)                                      227
जल आपूर्ति का गुणवत्ता सूचकांक                              100 फीसदी
जल आपूर्ति की मीटरिंग (प्रतिशत)                                100 फीसदी
गैर-राजस्व जल (एनआरडब्ल्यू)                                   कुल आपूर्ति जल का 38 फीसदी    
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