2004 में चयनित अनिल नागर समेत 19 एचसीएस और दो एचपीएस को बर्खास्त किया जाएगा। यह हलफनामा हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल किया है। आरोप है कि 2004 में हरियाणा सिविल सेवा और हरियाणा पुलिस सेवा अधिकारियों का चयन नियमों पर ताक पर रखकर किया गया।
सरकार ने इनकी सेवाओं को जारी रखने से पूरी तरह हाथ पीछे खींच लिए हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले 22 अधिकारियों सहित चयनित 64 एचसीएस को भी नियुक्ति नहीं दी जाएगी। अब हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) की डेंटल सर्जन भर्ती फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी एचसीएस अनिल नागर की बर्खास्तगी का रास्ता साफ हो गया है।
नागर भी बर्खास्त किए जाने वाले 19 एचसीएस अधिकारियों में शामिल हैं। भर्ती फर्जीवाड़े में फंसने के बाद वह एचपीएससी के उप सचिव पद से निलंबित चल रहे हैं। सरकार ने हालांकि, इन 21 एचसीएस-एचपीएस को कारण बताओ नोटिस जारी कर 30 दिन में जवाब भी मांगा है कि क्यों न उनकी सेवाएं समाप्त कर दें।
30 नवंबर को मुख्य सचिव ने दायर किया हलफनामा
सरकार की ओर से मुख्य सचिव ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में 30 नवंबर को हलफनामा दाखिल किया है। उस समय आईएएस विजयवर्धन मुख्य सचिव थे। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हलफनामे को रिकॉर्ड पर ले लिया। सरकार ने माना है कि 2004 की एचसीएस भर्ती प्रक्रिया में अपार अनियमितताएं हैं। सरकार अपने जवाब में यह बताने में विफल रही है कि 2016 में 102 में से 38 एचसीएस को नियुक्ति देने के लिए रजामंदी क्यों दी गई थी। शुक्रवार को भी इस मामले में सुनवाई होगी।
हुड्डा शासनकाल में बैठी थी जांच
ओमप्रकाश चौटाला के समय हुई इस भर्ती के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार आई। तब हुड्डा सरकार ने इन एचसीएस को ज्वॉइनिंग देने के बजाय जांच बैठा दी। पानीपत के तहसीलदार डॉ. कुलदीप मलिक समेत 22 चयनित एचसीएस ने 38 नियुक्ति देने के खिलाफ हाईकोर्ट में केस दायर कर दिया। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि वह 38 एचसीएस को नौकरी से हटाएगी या फिर बाकी चयनित 64 एचसीएस को भी नियुक्ति देगी।