हिमालय कराह रहा, पीड़ा सुनने की जरूरत
सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख में पिछले कुछ साल से प्रकृति के साथ काफी छेड़छाड़ हुई है। विकास के नाम पर विनाश हो रहा है। बड़े-बड़े हाइड्रो पावर और सोलर जैसे प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसका नुकसान लद्दाख के लोगों को हो रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। क्लाइमेट चेंज हो रहा है। स्थानीय लोग बहुत बुरी तरह से प्रभावित है। अगर अभी इसे नहीं रोका गया तो आने वाले समय में विनाश निश्चित है। ऐसा विकास कैसा, जिसमें कुछ मरें और कुछ लोग अरबपति बन जाएं। ये समझने की जरूरत है कि हिमालय कराह रहा है। उसकी पीड़ा सुननी चाहिए। स्थानीय लोगों को सशक्त करने की जरूरत है। लद्दाख के यूटी बनने के बाद ग्रुप ए की पिछले पांच साल में भर्ती नहीं निकली। युवा बेरोजगार घूम रहे हैं।
लगातार चलने से कई लोगों के पैरों में पड़े छाले
सीमा पर सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों को सुरक्षा मजबूत करने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उसके नाम पर कुछ भी बेच देना और शोषण और दोहन करना ठीक नहीं है। सोनम के साथ चल रहे कई लोगों के पैरों में छाले पड़ चुके हैं। उन्होंने पट्टियां बांधी हुई हैं। शुक्रवार को सेक्टर-38 के गुरुद्वारे में भी वह अपने जख्मों को देखते नजर आए। कई लोगों ने बताया कि वह रोजाना करीब 25 किमी पैदल चलते हैं। उन्हें दिल्ली तक कुल करीब 900 से 1000 किमी चलना है। लगातार चलने से कई लोगों की सेहत खराब हुई है। महिलाओं को भी तकलीफ हो रही है लेकिन हौसला बहुत मजबूत है। कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से चलते जा रहे हैं और दिल्ली जाकर ही राहत की सांस लेंगे।