शातिरों ने फर्जी चेक पर नगर निगम के संयुक्त आयुक्त रोहित गुप्ता और मुख्य वित्त अधिकारी वीएस ठाकुर के हस्ताक्षर किए और निगम के खाते से 28.51 लाख रुपये उड़ा लिए। ठग यहीं नहीं रुके और दूसरी बार 18 अक्तूबर को दो फर्जी चेक पर दोनों अधिकारियों के हस्ताक्षर कर एक करोड़ 21 लाख रुपये निकालने की कोशिश की। गनीमत रही कि बैंक ने इस बार निगम के अधिकारियों से इतनी बड़ी रकम निकालने के बारे में पूछ लिया, तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। मुख्य वित्त अधिकारी और सेक्शन ऑफिसर की शिकायत पर सेक्टर-17 थाना पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। फिलहाल पुलिस बैंक के सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है। वहीं, दोनों फर्जी चेक जांच के लिए सीएफएसएल में भेज दिए गए हैं।
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बैंक ऑफ बड़ौदा में है नगर निगम का खाता
निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि सेक्टर-37 स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में नगर निगम का खाता है। सोमवार को बैंक से फोन आया कि उनकी ओर से 13 अक्तूबर को चेक नंबर 000093 से 98.51 लाख और 16 अक्तूबर को चेक नंबर 000094 से 22.50 लाख रुपये किसी हुसैन मुतारिक शेख को देने के लिए जारी किए गए हैं। इस पर अधिकारियों ने हैरानी जताते हुए कोई रुपया निकालने से इनकार किया। तब बैंक की ओर से बताया गया कि 11 अक्तूबर को भी खाते से 28.51 लाख रुपये की निकासी चेक के माध्यम से हुई है।
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बैंक प्रबंधन आया हरकत में
इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल बैंक से संपर्क किया। साथ ही जिन चेक नंबरों से रुपये निकाले गए थे, उनकी असल प्रतियां उपलब्ध कराईं। तब बैंक प्रबंधन भी हरकत में आया और तत्काल पुलिस से शिकायत के लिए कहा। चेक पर संयुक्त आयुक्त व मुख्य वित्त अधिकारी के नाम से और सेक्शन ऑफिसर के पद के अनुसार हस्ताक्षर किए गए थे। अधिकारियों की शिकायत पर सेक्टर-17 थाना पुलिस शिकायत दर्ज कर मामले की जांच में जुट गई है।
काऊ सेस का रुपया, फिश प्लांट के नाम पर निकाला
आयुक्त ने बताया कि प्रशासन की ओर से शराब पर काऊ सेस लगाया गया था, जो गोशालाओं और पशुओं के विकास कार्य पर खर्च होना है। नगर निगम का एमओएच विभाग गोशालाओं की देखभाल करता है, इसलिए काऊ सेस का सेविंग अकाउंट बैंक ऑफ बड़ौदा में खुलवाया गया था। शातिरों ने निगम का फर्जी चेक नंबर 91 लगाकर कार्तिक्या फिश प्लांट-वानी के नाम पर रुपये निकाल लिए। जानवरों के नाम पर बैंक ने भी बिना किसी पूछताछ के ही रुपये दे दिए।
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बैंक रुपया लौटाए, नहीं तो करेंगे कानूनी कार्रवाई
निगम आयुक्त ने इस संबंध में बैंक प्रबंधन व उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि बिना कोई सूचना और जांच पड़ताल के बैंक ने आखिर ऐसे कैसे रुपये दे दिए। बैंक को अपने चेक और उसमें किए गए हस्ताक्षरों की एक बार जांच करनी चाहिए थी। इस मामले में बैंक के अधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए। आयुक्त ने कहा है कि बैंक निगम का पूरा पैसा वापस लौटाए, नहीं तो बैंक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवालः जब हस्ताक्षर नहीं हुए मैच तो कैसे पास हुआ चेक
पूरे मामले में बैंक के कर्मचारियों की गतिविधियां भी संदेह के घेरे में है। आयुक्त का कहना है कि एमओएच के पास बैंक से जारी सभी 10 चेक उपलब्ध हैं। वहीं, संयुक्त आयुक्त और मुख्य वित्त अधिकारी के हस्ताक्षर बैंक में दिए गए हस्ताक्षरों से मेल नहीं खा रहे हैं। ऐसे में बैंक ने 28.51 लाख की राशि कैसे दे दी।
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मामले में हमने पुलिस को शिकायत दे दी है। बैंक के अधिकारियों को भी रुपये वापस करने के लिए कह दिया है। ऐसा न होने पर कानूनी कार्रवाई भी करेंगे।
-आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम