निवेश के साथ टैक्स बचाने के विकल्पों के रूप में देखें तो म्यूचुअल फंड ज्यादा कारगर साबित होते हैं। बैंक एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर आपकी स्लैब के हिसाब से टैक्स लगाया जाता है। इससे वास्तविक रिटर्न पर बड़ा असर पड़ता है। उदाहरण के लिए आपको एफडी पर 6-7त्न ब्याज मिला और एक साल की तय सीमा से ज्यादा ब्याज होने पर अधिकतम टैक्स स्लैब 30त्न की दर से कर देना पड़ेगा।
इसी तरह, तीन साल से ज्यादा के म्युचुअल फंड पर लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है, जो इंडेक्सेशन के साथ 20त्न होता है। इससे वास्तविक रिर्टन पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) वाले म्युचुअल फंड में निवेश पर धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है। हालांकि, यह लाभ एफडी पर मिलता है, लेकिन ईएलएसएस तीन साल की परिपक्वता अवधि के कारण ज्यादा आकर्षक लगता है। शेयर बाजार से जुड़े होने के कारण इस पर रिेटर्न भी कहीं ज्यादा मिलता है।
थोड़े जोखिम में ज्यादा रिटर्न का मौका
म्युचुअल फंड पर एफडी की तुलना में थोड़ा जोखिम तो हमेशा रहता है, लेकिन इससे घबराने वाली स्थिति नहीं बनती। निवेशकों को अभी चढ़ते बाजार का लाभ उठाना चाहिए और थोड़े जोखिम के साथ ज्यादा रिटर्न का मौका मिलता है, तो दोनों हाथों से इसका स्वागत करना चाहिए। इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में हमेशा 15 प्रतिशत तक जबरदस्त रिटर्न दे सकते हैं। -ज्योति रॉय, डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (इक्विटी स्ट्रेटजी) , एंजल वन