विगत जून में सुमित नागपाल को तब अचानक बड़ी मुसीबत का सामना पड़ा, जब नियोक्ता ने उनके लॉकडाउन के दौर का वेतन रोक दिया। पैसे का प्रबंध करने के लिए उन्होंने पत्नी के नाम से टेक्निकल राइटिंग सर्विस की शुरुआत की। उनके क्लाइंट्स ने उन्हें जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवा लेने की सलाह दी है। ऐसे में, वह जानना चाहते हैं कि ऐसा करना उनके लिए क्यों जरूरी है।
जीएसटी के लागू होने से सेवा क्षेत्र में अनेक बदलाव आए हैं और एक तय दायरे में आने पर सेवा प्रदाताओं को रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। ऐसे में, सुमित पत्नी के नाम से जो काम कर रहे हैं, उसका सालाना टर्नओवर अगर 40 लाख से अधिक है, तो उन्हें जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
हालांकि कुछ ऐसी संस्थाएं भी हैं, जो उन व्यक्तियों या कंपनियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए कहती हैं, जिनके लिए वे काम करती हैं, क्योंकि ऐसे में, वे उन्हें मुहैया कराई गई सेवाओं पर टैक्स छूट का दावा कर सकती हैं। सुमित को जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए, जिसमें प्रॉप्राइटर के तौर पर उनकी पत्नी का नाम हो।
इस तरह व्यापार से होने वाली आय पत्नी के नाम होगी और सुमित को नौकरी से मिलने वाले वेतन को इससे अलग किया जा सकेगा। चूंकि बड़ी कंपनियां ऐसे लोगों के साथ काम करने को वरीयता देती हैं, जिनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन हो, इसलिए भी सुमित को ऐसा करना चाहिए।