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चेकप्वाइंट की रिपोर्ट: भारतीय कंपनियों पर छह माह में सबसे ज्यादा हुए साइबर हमले 

Sat, 31 Jul 2021 08:40 AM IST
Kuldeep Singh बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • वर्क फ्रॉम होम की वजह से दुनियाभर में बढ़ा साइबर हमले का खतरा
  • भारत में शिक्षा, रिसर्च, सरकार, सेना, बीमा, विनिर्माण, हेल्थकेयर क्षेत्र में ज्यादा साइबर हमले हुए
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विस्तार
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रिमोट वर्किंग (वर्क फ्रॉम होम) की वजह से दुनियाभर में साइबर हमलों का खतरा ज्यादा बढ़ गया है। इस लिहाज से भारतीय कंपनियों के लिए पिछले 6 महीने सबसे खराब रहे।

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1,738 बार साइबर हमला हुआ प्रत्येक भारतीय कंपनी पर
इस दौरान घरेलू भारतीय कंपनियों और हर सप्ताह औसतन 1,738 साइबर हमले हुए, जो दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 757 रहा। 

वर्क फ्रॉम होम की वजह से दुनियाभर में बढ़ा साइबर हमले का खतरा
चेकप्वाइंट्स रिसर्च की 'साइबर अटैक ट्रेंड्स-2021 मिड ईयर' रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में शिक्षा, रिसर्च, सरकार, सेना, बीमा, विनिर्माण, हेल्थकेयर क्षेत्र की कंपनी और सबसे ज्यादा साइबर हमले हुए। वैश्विक स्तर पर हेल्थकेयर को ज्यादा निशाना बनाया गया। 6 महीने में दुनियाभर में साइबर हमलों की संख्या 29 फ़ीसदी बढ़ गई है।

अमेरिका जैसे देश भी हमले के शिकार

  • अमेरिका : साइबर हमलों की संख्या में 17 प्रतिशत इजाफा। हर सप्ताह औसतन 443 बार साइबर हमले हुए।
  • ईएमईए क्षेत्र : यूरोप मध्य एशिया और अफ्रीका के देशों में हर सप्ताह औसतन 777 साइबर हमले हुए, जो 36 फीसदी ज्यादा हैं।
  • एशिया-प्रशांत क्षेत्र : हर सप्ताह स्तन 1338 बार साइबर हमले हुए, जो इस साल के शुरुआती महीनों में से 13 फ़ीसदी ज्यादा है।
  • यूरोप : हमले 27 फ़ीसदी बढ़े, जबकि लैटिन अमेरिका में 19 फ़ीसदी इजाफा हुआ।

रेनसमवेयर अटैक 93 फीसदी इजाफा 

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साइबर सुरक्षा कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर रेनसमवेयर हमले में पिछले साल की समान छमाही के मुकाबले इस साल 93 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अन्य देशों के मुकाबले भारत हैकर्स के लिए सबसे बड़ा बाजार रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी कंपनी के सिस्टम को हैक कर डाटा चोरी करना और उसके बदले पैसे वसूलना हैकर्स के लिए आम बात हो गई है।

उपभोक्ता भी शिकार 
2021 की पहली छमाही में अपराधियों ने हाइब्रिड कामकाज में बदलाव का फायदा उठाते हुए कंपनियों की आपूर्ति श्रंखला को निशाना बनाया है। उन कंपनियों को भी शिकार होना पड़ा है जो काम के लिए साझा नेटवर्क का इस्तेमाल करती है। - माया होरोविट्स, उपाध्यक्ष, चेक प्वाइंट

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