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किताब, जिसने बढ़ाई सेक्स ट्वायज की बिक्री

ब्रितानी लेखिका ईएल जेम्स की किताब ‘फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे’ पर आधारित फिल्म फरवरी में अमरीका और ब्रिटेन में रिलीज हो चुकी है, लेकिन भारत में ये फिल्म अब तक सेंसर बोर्ड का टेस्ट पास नहीं कर पाई है।


फिल्म तो अब तक रिलीज हुई नहीं, लेकिन इसे लेकर लोगों के बीच जो उत्सुकता बनी हुई है, उसका फायदा उठाते हुए बाजार में कई चीजें तेजी से बिक रही हैं।

एक कारोबारी और एक कॉलेज स्टूडेंट के ‘अजीबो-गरीब’ कामुक रिश्ते पर आधारित उपन्यास 'फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे' साल 2012 में बाजार में आई और इतनी लोकप्रिय हुई कि दुनिया भर में सात करोड़ से ज्यादा लोगों ने इसे खरीदा और पढ़ा। भारत की ही बात की जाए तो तीन भागों वाले इस उपन्यास की अब तक तीन लाख से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं।

इस उपन्यास पर आधारित फिल्म को लेकर कयास लग रहे थे कि दूसरे देशों के साथ-साथ भारत में भी इसे वेलेन्टाइंस डे के आसपास रिलीज किया जाएगा।

फिल्म को अभी तक भारतीय सेंसर बोर्ड ने रिलीज की अनुमति नहीं दी है, लेकिन उसका अप्रत्यक्ष फायदा किताब के प्रकाशक के साथ-साथ सेक्स ट्वॉयज बेचने वाली वेबसाइट्स को हुआ है।

कामुक एक्सपेरिमेंट

फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे किताब में उस जीवन शैली का उल्लेख है, जिसमें लोग सेक्स के दौरान एक-दूसरे को दर्द देते हैं, क्योंकि क्योंकि दर्द के लेन-देन और ताकत की अभिव्यक्ति उनकी कामुकता को एक नए मुकाम तक ले जाती है। इस जीवन शैली को बीडीएसएम के नाम से भी जाना जाता है।

इस जीवनशैली में एक शख्स ‘डॉमिनेन्ट’ यानी प्रधान है और दूसरा ‘सबमिसिव’ यानी अधीन है। पहले का हक है अपना जोर आजमाना और दूसरे की जिम्मेदारी है उस शक्ति प्रदर्शन को बर्दाश्त करना।

सेक्स से जुड़ी चीजें बेचने वाली एडल्ट वेबसाइट www.thatspersonal.com ने ब्रितानी सेक्स ट्वॉयज वेबसाइट www.lovehoney.com के साथ मिलकर पिछले साल दिसंबर में फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे नाम की एक किट लॉन्च की, जिसमें हथकड़ी, चाबुक, फुट्टा और आंखों पर बांधने वाली पट्टी जैसे आइटम उपलब्ध हैं।

वेबसाइट के सीईओ समीर सरैया ने बीबीसी को बताया कि इस किट के लॉन्च करने के कुछ दिनों के भीतर ही उन्होंने इसकी मांग में हफ्ते-दर-हफ्ते 80 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की।

फिल्म रिलीज न होने का हुआ फायदा

उन्होंने कहा, "इस फिल्म की इतनी चर्चा हो रही थी कि इसका सीधा फायदा मार्केटिंग दृष्टिकोण से उन प्रॉडक्ट्स को होना ही था, जिन पर इसका नाम हो। फिल्म रिलीज नहीं हुई, उसका भी फायदा हमें हुआ और जाहिर है जब रिलीज हो जाएगी तो उसके बाद भी लोग इन चीजों को खरीदना चाहेंगे। हम ये सुनिश्चित करेंगे कि हम उस डिमांड को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहें, यानी हम अपना स्टॉक पूरा रखेंगें।"

उन्होंने बताया कि उनकी वेबसाइट पर आने वाले लोग इस किट पर औसतन 4,600 रुपए खर्च कर रहे हैं। तो वहीं ऐसी ही एक दूसरी वेबसाईट www.iambesharam.com के सीईओ राज अरमानी ने बीबीसी को बताया कि फरवरी के महीने में उनकी वेबसाइट पर फिफ्टी शेड्स से जुड़े प्रॉडक्ट्स की मांग में जनवरी के मुकाबले 122 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

उनका कहना था, "भारतीय समाज में अब वो दौर आ गया है जब लोग अपनी कामुक इच्छाओं से जुड़े एक्सपेरिमेंट को एक मौका जरूर देना चाहते हैं। खासतौर पर जिन नौजवानों की तनख्वाहें अच्छी हैं और जो पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित हैं, उन्हें इन चीजों पर खर्च करने में कोई हर्ज नहीं है।"

फिफ्टी शेड्स पार्टी

सेक्स से जुड़ी चीजों के अलावा बाजार में पार्टियों के लिए फिफ्टी शेड्स मास्क और रिबन जैसी चीजें भी बिक रही हैं। हाल ही में कोलकाता के एक अखबार संस्था ने 'फिफ्टी शेड्स ऑफ रेड' थीम के नाम से एक पार्टी आयोजित की, जिसमें लोग लाल रंग के मास्क, हथकड़ियां और टाई ले कर शामिल हुए।

इस किताब को प्रकाशित करने वाले पब्लिशिंग हाउस पेन्गुइन रैन्डम हाउस से जुड़ी कैरोलीन न्यूबरी ने बीबीसी को बताया कि फिल्म रिलीज होने से पहले ये किताब हिंदुस्तान टाइम्स नील्सन लिस्ट में 80वें नंबर से सीधा टॉप टैन पर वापस आ गई थी।

कैरोलीन ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मैं काफी आश्चर्यचकित थी ये देखकर कि भारत में लोग इस किताब में इतनी दिलचस्पी ले रहे हैं और वो भी दूसरों के सामने। मैंने लोगों को मेट्रो ट्रेन और हवाई जहाज में ये किताब पढ़ते हुए देखा। कुछ लोग इसे इसलिए भी पढ़ रहे हैं, क्योंकि उन्होंने पश्चिमी देशों में इसकी लोकप्रियता के बारे में बहुत सुना है, लेकिन ये बात तो साफ है कि इस तरह की किताबों में लोगों की रुचि बढ़ रही है।"

‘झाड़ू से पीटो, नहीं तो सेक्स नहीं कर पाउंगा’

भारत में सेक्स के बारे में आमतौर पर खुल कर बात नहीं की जाती, जिसकी वजह से कई लोगों को सेक्स के बारे में ठीक जानकारी नहीं होती।


कई लोग अपनी सेक्स लाइफ़ से जुड़े सवाल अक्सर सेक्सॉलॉजिस्ट को लिखते हैं जो कि अखबारों और मैगजीनों में छापे जाते हैं। 90 वर्षीय महिंदर वत्स भारत के जाने-माने सेक्सॉलॉजिस्ट हैं और पिछले तीन दशकों से लोगों के सवालों का जवाब देते रहे हैं।

उन्होंने बीबीसी को बताया कि एक बार उन्हें एक आदमी ने ये सवाल लिख भेजा, "जब तक मेरी पत्नी मुझे झाड़ू से नहीं पीटती मेरी कामुक इच्छा जागती ही नहीं। लेकिन हाल ही में वो चल बसी। अब मैं कैसे ऐसी पत्नी ढूंढ़ूं जो मेरी कामुक इच्छा फिर से झाड़ू मार कर जगा सके?"
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भारतीयों में आ रहा है खुलापन

डॉक्टर वत्स का कहना था, "इस जीवनशैली में कुछ गैरमामूली नहीं है। गैरमामूली ये है कि लोग इसके बारे में खुल कर बात नहीं करते थे। आजकल भारतीय लोग सेक्स से जुड़ी अपनी कामुक इच्छाओं को बयान करने में शर्माते नहीं हैं, खासतौर पर शहरों में।"

क्या इसका मतलब ये है कि भारतीय समाज अपनी सेक्स की जरूरतों को लेकर एक नई सोच अपना रहा है? इस सवाल का कोई साफ जवाब तो नहीं है, लेकिन कम से कम सेक्स टॉयज बेचने वाली वेबसाइट्स और सेक्स मामलों के जानकारों का तो यही कहना है।
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