तीन चौथाई लोग नौकरी के काबिल नहीं
ऐसी खबरें हैं कि लाखों इंजीनियरों और बिजनेस स्कूल से डिग्री लेने वाले युवाओं में करीब तीन चौथाई नौकरी के काबिल नहीं हैं। यह देश की शिक्षा व्यवस्था के साथ दाखिला प्रक्रिया की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है। निजी आर्थिक शोध संस्थान सीएमआईई के आंकड़े का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि फरवरी तक 3.12 करोड़ युवा पूरी सक्रियता के साथ नौकरियां तलाश रहे हैं। कुल 1.35 करोड़ की आबादी में 60 फीसदी से अधिक 35 साल से कम के हैं।
कंपनियों-सरकारों को मिलकर करना होगा काम
रोमेट्टी के मुताबिक, ऐसा हो सकता है आपके पास किसी विश्वविद्यालय की डिग्री न हो, लेकिन इसके बावजूद आप बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि धारणा के विपरीत पर्याप्त मात्रा में नौकरियां हैं और समान संख्या में ही युवा नौकरी तलाश रहे हैं।
लेकिन कौशल की कमी नौकरी मिलने की उनकी राह में रोड़ा है और यही वास्तविक समस्या है। इस समस्या के समाधान के लिए कंपनियों और सरकारों को साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हम ऐसी दुनिया नहीं चाहेंगे, जहां कुछ लोग नई प्रौद्योगिकी में काम करना जानते हैं, जबकि बहुसंख्यकों के साथ ऐसा नहीं है।
तकनीक से नौकरियों को खतरा नहीं
क्या तकनीक से नौकरियों को खतरा है, इस सवाल के जवाब में आईबीएम प्रमुख ने कहा कि इससे नौकरियों की प्रकृति में बदलाव आएगा। उनके मुताबिक, दो साल पहले दिग्गज यूरोपीय टेक कंपनी के मुखिया ने भी समान चिंताएं जताई थी।
उन्होंने कहा था कि 65 फीसदी से अधिक भारतीय आईटी कर्मचारी दोबारा प्रशिक्षित करने के काबिल नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि इसके लिए भारतीय शिक्षा प्रणाली के साथ प्रौद्योगिकी कंपनियां भी जिम्मेदार हैं।