क्रिप्टोकरेंसी के गैर-कानूनी चलन को लेकर केंद्र सरकार गंभीर है। आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार इस पर कोई बड़ा फैसला ले सकती है। केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी समिति ने क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है।
अगर यह सिफारिश मानी जाती है तो क्रिप्टोकरेंसी पर न केवल प्रतिबंध लगेगा, बल्कि इससे जुड़े केसों को अपराध की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
केंद्र सरकार के सूत्र बताते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक दूसरा विकल्प भी सोचा जा रहा है। इसके तहत सरकार खुद या अपनी किसी वित्तीय संस्था जैसे आरबीआई के जरिए क्रिप्टोकरेंसी जारी करा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी के मामले में केंद्र सरकार ने नवंबर 2017 में एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया था। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है।
कहा गया है कि इसे किसी भी तरह से कानूनी नहीं माना जा सकता। यदि इसके चलन को मंजूरी दी जाती है तो निवेशकों का पैसा जोखिम में फंस सकता है। इसी वजह से समिति ने इसे अपराध की श्रेणी में लाने की बात कही है।
चूंकि क्रिप्टोकरेंसी सरकार जारी नहीं करेगी और इस पर उसका कोई नियंत्रण भी नहीं रहेगा, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में इस पर बैन लगाने की सिफारिश की गई है।
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर केंद्र सरकार जिस दूसरे विकल्प पर विचार कर रही है, उसमें एक संभावना यह है कि इस करेंसी को खुद सरकार जारी करे। आरबीआई जैसी किसी संस्था को इसके संचालन की जिम्मेदारी दी जाए।
यही वह स्थिति है जब क्रिप्टोकरेंसी को लीगल टेंडर का दर्जा दिया जा सकता है। केंद्र सरकार ने इसके लिए आरबीआई और सेबी जैसी संस्थाओं के विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं।
बता दें कि विभिन्न देशों में दो हजार से अधिक क्रिप्टोकरेंसी चलन में हैं। इसका कुल बाजार $119.46 अरब का बताया गया है।