खुदरा महंगाई में जुलाई, 2023 के बाद से गिरावट जारी है। सब्जी समेत खाने-पीने की अन्य वस्तुएं सस्ती होने से खुदरा महंगाई अक्तूूबर, 2023 में घटकर आरबीआई के चार फीसदी के लक्ष्य के करीब पहुंच गई। सरकार ने केंद्रीय बैंक को खुदरा महंगाई को दो फीसदी घट-बढ़ के साथ चार फीसदी पर रखने की जिम्मेदारी दी हुई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के सोमवार के आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई सितंबर के 5.33 फीसदी से घटकर 5.12 फीसदी पर आ गई। शहरी महंगाई भी 4.65 फीसदी से कम होकर 4.62 फीसदी रह गई।
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, मानसून के असमान रहने के बाद अनाज की कीमतों में वृद्धि अक्तूबर में दिखाई दी है। प्याज जैसी कुछ सब्जियों की ऊंची कीमतों का असर आंशिक रूप से कई अन्य सब्जियों के दाम में मौसमी गिरावट से नहीं दिखा। इससे कुछ राहत मिली है।
प्याज : खुदरा बाजार में अब भी 59.09 रुपये के उच्च स्तर पर
अखिल भारतीय स्तर पर सोमवार को प्याज का औसत खुदरा भाव 59.09 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चस्तर पर बना हुआ है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को देश में प्याज की उच्चतम कीमत 90 रुपये और न्यूनतम कीमत 20 रुपये प्रति किलोग्राम रही। अखिल भारतीय मॉडल कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम है। दिल्ली में कीमत घटकर 60 रुपये प्रति किलो पर आ गई है।
इससे पहले, जून में महंगाई दर 4.87 प्रतिशत दर्ज की गयी थी। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अक्टूबर बैठक में चालू वित्त वर्ष 2023-24 में खुदरा मुद्रास्फीति 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। यह 2022-23 के 6.7 प्रतिशत के मुकाबले कम है। सरकार ने आरबीआई को खुदरा महंगाई दर दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी दी हुई है। केंद्रीय बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति पर विचार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति पर गौर करता है।