रिजर्व बैंक ने पेट्रोल-डीजल की बेतहाशा बढ़ती कीमतों से उत्पाद एवं सेवाओं के खुदरा मूल्य बढ़ने की चिंता जताई है। शुक्रवार को जारी एमपीसी मिनट्स में आरबीआई ने बताया कि अगस्त, सितंबर में खुदरा महंगाई दर में बड़ी गिरावट राहत की बात है, लेकिन महंगा तेल यातायात और माल ढुलाई का बोझ लगातार बढ़ा रहा है।
गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में 6-8 अक्तूबर तक हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक के मुख्य अंश (एमपीसी मिनट्स) जारी कर आरबीआई ने बताया कि महामारी से उबर रही अर्थव्यवस्था को अभी नीतिगत सहारे की जरूरत है। इस नाजुक मोड़ पर हमारा हर फैसला बेहद संवेदनशील और नपा तुला रहता है।
आरबीआई के कार्यकारी निदेशक सागर ने कहा, कच्चा तेल 85 डॉलर पार कर गया है और पूरे साल 80 डॉलर के आसपास रहने का अनुमान है। यह खुदरा महंगाई को 0.20 फीसदी बढ़ा देगा, जिससे विकास दर में 0.15 फीसदी गिरावट आएगी। चालू खाते के घाटे का बोझ भी 0.25 फीसदी बढ़ जाएगा।
रेपो रेट में बदलाव न करने पर सभी सहमत
गवर्नर दास ने बताया कि एमपीसी बैठक में रेपो रेट को 4 फीसदी बनाए रखने पर सभी छह सदस्यों ने सहमति जताई थी, जबकि नीतिगत रुख को नरम रखने पर एमपीसी सदस्य जयंत एस वर्मा को छोड़ अन्य सभी सहमत रहे। दास ने कहा, अगर देश के कई हिस्सों में बारिश का कहर नहीं टूटा होता तो खुदरा महंगाई दर और नीचे आ जाती। सितंबर में खुदरा महंगाई दर 4.35 फीसदी पहुंच गई थी।