स्वास्थ्य बीमा के तहत किसी पॉलिसी अवधि के दौरान कई क्लेम नहीं लेने वाले पॉलिसी धारकों को बीमा कंपनियां नो क्लेम बोनस (एनसीबी) की सुविधा देती हैं। यह एक तरह का रिवॉर्ड होता है। स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि पॉलिसी अवधि के दौरान इलाज के लिए पॉलिसीधारक क्लेम करता है।
महामारी और महंगाई में बढ़ गई है एनसीबी की अहमियत
इसलिए नहीं लिया तो ऐसी स्थिति में कंपनियां आपको नो क्लेम बोनस देती है। महंगाई की वजह से इस सुविधा की अहमियत पहले से ज्यादा बढ़ गई है। इसलिए क्लेम नहीं लेने वाले पॉलिसीधारक इस सुविधा का लाभ उठाते हुए बीमा कवरेज बढ़ाने के साथ प्रीमियम रखी राशि भी घटा सकते हैं। इसके अलावा चिकित्सा से जुड़ी महंगाई को देखते हुए आपके स्वास्थ्य बीमा कवरेज पर असर न पड़े। इसमें भी नो क्लेम बोनस की अहम भूमिका हो सकती है।
हर साल बढ़ता है कवरेज का दायरा
नो क्लेम बोनस की खासियत है कि हर क्लेम-फ्री वर्ष में बीमा कवरेज का दायरा बढ़ता जाता है। इसके अलावा बीमा कंपनियां प्रीमियम में कोई बदलाव किए बिना कवरेज बढ़ाने के साथ जिम, स्पा और योग सब्सक्रिप्शन या वैलनेस से जुड़े उत्पादों की सुविधा भी देती है।
200 प्रतिशत तक बढ़ सकता है सम एश्योर्ड
पॉलिसी धारक को नो क्लेम बोनस कितना मिलेगा। यह बीमा कंपनियों की शर्त पर निर्भर है इसलिए पुलिस खरीदते वक्त बीमा कंपनियों की ओर से एनसीपी के तहत मिलने वाले ऑफर की जरूर जांच करें कम कुछ कंपनियां 200 फीसदी तक सम एश्योर्ड बढ़ाने की सुविधा देती है।
बदल सकते हैं बीमा कंपनी
आप मौजूदा कंपनी से संतुष्ट नहीं हैं और दूसरी कंपनी में अपनी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी यह हस्तानांतरित कराना चाहते हैं तो यह नो क्लेम बोनस भी वहां ट्रांसफर हो जाता है। इस सुविधा का लाभ तभी मिलता है, जब तय तारीख से पहले ही पॉलिसी को रिन्यू कराते हैं।
इसके लिए कंपनियां रिन्यू कराने के लिए तारीख से 30 दिनों का समय देती है। इस दौरान पॉलिसी रिन्यू नहीं कराने पर यह सुविधा नहीं मिलती है। इसका लाभ व्यक्तिगत और फैमिली फ्लोटर दोनों स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में ले सकते हैं।