नीति आयोग ने कहा है कि भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए ‘विजन’ दस्तावेज तैयार किया जा रहा है। आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा, अगले 24 साल में देश लगभग 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकती है।
भारत सरकार का दावा है कि देश की अर्थव्यस्था में अभूतपूर्व बदलाव हो रहे हैं। इसी बीच नीति आयोग ने कहा है कि ‘विजन इंडिया एट 2047’ का मसौदा तैयार किया जा रहा है। नीति आयोग के शीर्ष अधिकारियों में एक बीवीआर सुब्रमण्यम के अनुसार देश की इकोनॉमी अगले 24 साल में 30 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी। साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था विकसित श्रेणी में भी गिनी जाएगी।
विज्ञापन
सुधारों की रूपरेखा तैयार
नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बीवीआर सुब्रमण्यम के अनुसार, आयोग ‘विजन’ (लक्ष्य) दस्तावेज तैयार कर रहा है। रविवार को सुब्रमण्यम ने कहा, देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में लगातार प्रयास हो रहे हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी संस्थागत और संरचनात्मक बदलाव/सुधारों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
30 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, विजन दस्तावेज बना रहा नीति आयोग
उन्होंने कहा, दस्तावेज का टाइटल ‘विजन इंडिया एट 2047’ रखा गया है। यह मसौदा दिसंबर 2023 तक तैयार हो जाएगा। बीवीआर सुब्रमण्यम के अनुसार मसौदा तैयार होन के बाद अगले तीन महीनों में इसे पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा, 2047 तक भारत करीब 30 लाख करोड़ डॉलर (29.2 लाख करोड़ डॉलर) की विकसित अर्थव्यवस्था बन सकती है। इसके लिए एक ‘विजन’ प्लान तैयार किया जा रहा है।
विज्ञापन
मध्यम आय और गरीबी का जाल तोड़ना बेहद जरूरी
नागरिकों को मध्यम-आय के जाल से बचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे नीति आयोग की योजना के बारे में बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा, आयोग मध्यम-आय के जाल को लेकर चिंतित है... भारत को गरीबी और मध्यम-आय का जाल तोड़ना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील, वर्ल्ड बैंक का पैमाना
गौरतलब है कि मई, 2023 में नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक हुई थी। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों से देश को 2047 तक विकसित बनाने का लक्ष्य लेकर चलने को कहा था। पीएम मोदी के आह्वान के अलावा ये जानना भी जरूरी है कि विश्व बैंक किस इकोनॉमी को उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के रूप में परिभाषित करता है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, प्रति व्यक्ति करीब 10 लाख रुपये (12,000 डॉलर) से अधिक की वार्षिक आय वाले देशों को उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था माना जाता है।