पूंजी बाजार की नियामक सेबी ने केयर्न इंडिया पर 5.25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। यह जुर्माना 2014 में शेयर पुनर्खरीद मामले में भ्रामक घोषणा के संदर्भ में लगाया गया है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक आदेश में कहा कि उस वक्त केयर्न इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और केयर्न के निदेशक रहे पी एलांगो, कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल अमन मेहता तथा निदेशक (जोखिम आश्वासन) और कंपनी सचिव रही नीरजा शर्मा पर 15-15 लाख रुपये का अलग से जुर्माना लगाया गया है। इन तीनों अधिकारियों ने जनवरी 2014 में पुनर्खरीद से जुड़े सार्वजिक विज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे और भ्रामक घोषणा करने में कंपनी की मदद की।
इश्यू की 50 प्रतिशत भी पुनर्खरीद नहीं की
सेबी ने विस्तृत जांच में पाया कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में पर्याप्त बिक्री आर्डर उपलब्ध होने के बावजूद केयर्न ने पर्याप्त खरीद आर्डर नहीं दिए। नियामक के अनुसार केयर्न पुनर्खरीद निर्गम का कम-से-कम 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं कर पाई जबकि स्थिति कंपनी के अनुकूल थी।
सेबी ने अपने 41 पृष्ठ के आदेश में कहा कि एनएसई में पर्याप्त बिक्री आर्डर की उपलब्धता के बावजूद केयर्न ने पर्याप्त खरीद आर्डर नहीं दिए। इसके जरिये उसने निवेशकों के निर्णय को प्रभावित करने और प्रतिभूतियों की बिक्री या खरीद को प्रेरित करने के मकसद से शेयरों के पुनर्खरीद के बारे में एक भ्रामक घोषणा करके धोखाधड़ी की।
सेबी के अनुसार कंपनी ने पुनर्खरीद की घोषणा की लेकिन उसे पूरा करने का इरादा नहीं दिखाया। इकाइयों ने धोखाधड़ी के साथ काम किया और पीएफयूटीपी (धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार गतिविधियों पर निषेध) के नियमों के साथ ही पुनर्खरीद मानदंडों का उल्लंघन किया।
2014 में की थी यह घोषणा
केयर्न ने 14 जनवरी 2014 को सार्वजनिक घोषणा की थी कि खुले बाजार से अधिकतम 335 रुपये प्रति शेयर पर 10 रुपये के 17,08,95,522 शेयरों की पुनर्खरीद करेगी। यह पुनर्खरीद अधिकतम 5,725 करोड़ रुपये की होनी थी।
कंपनी के अनुसार 27 जून 2014 तक वह कुल 3,67,03,839 शेयरों की पुनर्खरीद कर पाई। यह कुल प्रस्तावित पुनर्खरीद का 21.48 प्रतिशत था। कंपनी ने इसके लिए कुल 1,225.45 करोड़ रुपये का उपयोग किया, जो निर्धारित राशि का 28.59 प्रतिशत था।
नियमानुसार यह जरूरी था
केयर्न पुनर्खरीद आकार की न्यूनतम 50 प्रतिशत राशि का उपयोग नहीं कर पाई, जबकि सेबी पुनर्खरीद नियमन के तहत यह जरूरी था। इसीलिए कंपनी ने पुनर्खरीद अवधि बढ़ाने का आग्रह किया, जिसे सेबी ने स्वीकार नहीं किया। बता दें केयर्न इंडिया का 2018 में वेदांता लि. में विलय हो गया है।